परबत्ता (खगड़िया)। खगड़िया जिले के परबत्ता प्रखंड स्थित मध्य विद्यालय सौढ़ भरतखण्ड में बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य एवं भावनात्मक कल्याण को लेकर शिक्षक-अभिभावक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बच्चों के सर्वांगीण विकास, अभिभावकों की भूमिका तथा घर और विद्यालय के बीच बेहतर समन्वय पर विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय के प्रधानाध्यापक संजय कुमार पासवान ने की, जबकि संचालन शिक्षक सिद्धार्थ कुमार ने किया। संगोष्ठी में बड़ी संख्या में अभिभावकों ने भाग लेकर बच्चों की शिक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक विकास से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर जानकारी प्राप्त की।
अपने संबोधन में प्रधानाध्यापक संजय कुमार पासवान ने कहा कि बच्चों के उज्ज्वल भविष्य और संतुलित व्यक्तित्व निर्माण में परिवार, विद्यालय और समाज की समान रूप से महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों की मानसिक एवं भावनात्मक आवश्यकताओं को समझने की अपील करते हुए कहा कि वर्तमान समय में मोबाइल फोन का बढ़ता उपयोग बच्चों के व्यवहार और पढ़ाई पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है। इसलिए अभिभावकों को इस दिशा में सजग होकर सकारात्मक पहल करनी चाहिए।
शिक्षक सिद्धार्थ कुमार ने कहा कि बच्चों के अधिगम और विकास की प्रक्रिया केवल विद्यालय तक सीमित नहीं है, बल्कि घर का वातावरण भी इसमें महत्वपूर्ण योगदान देता है। उन्होंने बताया कि संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य अभिभावकों को बच्चों की भावनात्मक जरूरतों के प्रति जागरूक बनाना तथा घर में पढ़ाई के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने के लिए प्रेरित करना है।
उन्होंने अभिभावकों को सलाह दी कि वे बच्चों के साथ प्रेमपूर्वक और धैर्य के साथ संवाद करें, उनकी बातों को ध्यान से सुनें और उनकी भावनाओं को समझने का प्रयास करें। उन्होंने कहा कि बच्चों की तुलना दूसरों से करने के बजाय उनकी छोटी-छोटी उपलब्धियों की भी सराहना करनी चाहिए। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ता है और वे बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित होते हैं।
सिद्धार्थ कुमार ने कहा कि बच्चों को केवल शिक्षा ही नहीं, बल्कि स्नेह, सहयोग और सकारात्मक मार्गदर्शन की भी आवश्यकता होती है। अत्यधिक डांट-फटकार और तुलना उनके मानसिक विकास को प्रभावित कर सकती है। उन्होंने अभिभावकों को प्रतिदिन कम से कम 15 से 20 मिनट बच्चों के साथ बातचीत करने, उन्हें साफ-सुथरे वस्त्रों में विद्यालय भेजने तथा घर में पढ़ाई के लिए एक अलग और शांत स्थान उपलब्ध कराने का सुझाव दिया।
उन्होंने यह भी कहा कि बच्चों को प्रतिदिन बोलकर पढ़ने, पुस्तकें पढ़ने और विभिन्न रचनात्मक गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रेरित करना चाहिए, जिससे उनकी अभिव्यक्ति क्षमता और आत्मविश्वास दोनों का विकास हो सके।
संगोष्ठी के बाद अभिभावकों को विद्यालय के विभिन्न कक्षाओं एवं पोषण वाटिका का भ्रमण भी कराया गया। इस दौरान विद्यालय में संचालित शैक्षणिक एवं पोषण संबंधी गतिविधियों की जानकारी दी गई।
शिक्षक निरंजन कुमार ने बताया कि बैठक में विद्यालय से लेकर घर तक सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण बनाने, बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण, स्वच्छता तथा नियमित अध्ययन पर भी विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित अभिभावकों ने प्रतिदिन अपने बच्चों के साथ कम से कम 15 मिनट संवाद करने और उनके मानसिक एवं भावनात्मक विकास में सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया।
इस अवसर पर प्रधानाध्यापक संजय कुमार पासवान, शिक्षक सिद्धार्थ कुमार, निरंजन कुमार, रामविनोद साह, रामलाल पंडित, मीनाक्षी कुमारी, उत्कर्ष कुमार, सार्थक कुमार सहित अभिभावक अरविंद कुमार राणा, मनोहर दास, संगीता देवी, अंजली देवी, सोनी देवी, रीतू देवी एवं चंद्रशेखर दास उपस्थित थे।
संगोष्ठी का उद्देश्य केवल बच्चों की पढ़ाई पर चर्चा करना नहीं था, बल्कि उनके मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक मजबूती और सकारात्मक भविष्य निर्माण के लिए अभिभावकों को जागरूक एवं सहभागी बनाना भी था।
रिपोर्ट: दैनिक बिहार पत्रिका, खगड़िया
Author: दैनिक बिहार पत्रिका
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