जेल में एक बंदी की मौत… इंसाफ के लिए चारदीवारी के बाहर गरज उठी आवाज, सरकार को झुकना पड़ा!

खगड़िया की इस कहानी में मौत हुई थी सलाखों के पीछे, लेकिन इंसाफ की शुरुआत हुई इंसानियत के एक दस्तावेज़ से। अंगद दास नाम था उस बंदी का, जिसकी सांसें थम गई थीं उपकारा, उदाकिशुनगंज की अंधेरी कोठरी में। परिवार गम में डूबा था, लेकिन इंसाफ की उम्मीद अब भी बाकी थी। यह सिर्फ एक … Read more