
रिपोर्ट:- उमाकांत पोद्दार।
चांदन/बांका:- ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी मानी जाने वाली आशा कार्यकर्ता और आशा फैसिलिटेटर इन दिनों अपने लंबित प्रोत्साहन एवं पारितोषिक राशि को लेकर आर्थिक संकट और आक्रोश से गुजर रही हैं। चांदन प्रखंड क्षेत्र की आशा कार्यकर्ताओं का आरोप है कि उन्हें दैनिक स्वास्थ्य सेवाओं के एवज में मिलने वाली प्रोत्साहन राशि करीब पांच माह से लंबित है। वहीं राज्य सरकार की ओर से मिलने वाली पारितोषिक राशि के भुगतान को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है।आशा कार्यकर्ताओं का कहना है कि कोरोना संक्रमण के कठिन दौर में जब लोग घरों से निकलने से डरते थे, उस समय आशा कार्यकर्ताओं ने अपनी जान जोखिम में डालकर घर-घर सर्वे, संक्रमित लोगों की जानकारी जुटाने, टीकाकरण एवं जागरूकता अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग की पहुंच मजबूत करने में आशा कार्यकर्ताओं की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण रही है।
जन्म से मृत्यु तक स्वास्थ्य विभाग के काम में भूमिका
आशा कार्यकर्ताओं ने बताया कि उनसे केवल एक-दो काम नहीं, बल्कि गर्भवती महिलाओं की देखभाल से लेकर प्रसव, नवजात एवं बच्चों के टीकाकरण, परिवार नियोजन, स्वास्थ्य जागरूकता, एनसीडी स्क्रीनिंग समेत कई कार्यक्रमों में काम लिया जाता है। इसके अलावा आधार से संबंधित कार्य और भाव्या पोर्टल पर ऑनलाइन एंट्री जैसे काम भी करने का दबाव रहता है।उनका कहना है कि कई आशा कार्यकर्ता कम पढ़ी-लिखी हैं। इसके बावजूद परिवार के सदस्यों की मदद लेकर ऑनलाइन पोर्टल पर एंट्री सहित विभाग द्वारा दिए गए कार्यों को पूरा करती हैं। इसके बदले मिलने वाली राशि समय पर नहीं मिलने से परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है।राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार की आधिकारिक जानकारी के अनुसार आशा कार्यकर्ताओं को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत 53 प्रकार के प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन दिए जाते हैं। बिहार में राज्य फंड से अतिरिक्त प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन का भी प्रावधान है। वहीं केंद्र सरकार के उपलब्ध दस्तावेजों में भी बिहार के लिए राज्य फंड से आशा एवं आशा फैसिलिटेटर को अतिरिक्त प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन का प्रावधान दर्ज है।
काम का दबाव, भुगतान पर चुप्पी का आरोप
आशा कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि कार्य में किसी प्रकार की कमी होने पर अस्पताल स्तर से चयन मुक्त करने तक की चेतावनी दी जाती है। उनका कहना है कि काम नहीं करने पर कार्रवाई की बात कही जाती है, लेकिन महीनों से लंबित प्रोत्साहन राशि के भुगतान को लेकर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया जाता।एक आशा कार्यकर्ता ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग के लिए लगातार काम करने के बावजूद भुगतान के लिए बार-बार कार्यालय का चक्कर लगाना पड़ रहा है। उनका कहना है कि इतनी कम राशि में परिवार चलाने वाली आशा कार्यकर्ताओं के लिए पांच माह का भुगतान लंबित रहना गंभीर आर्थिक परेशानी है।
सितंबर तक भुगतान नहीं हुआ तो आंदोलन
आशा कार्यकर्ताओं ने कहा कि यदि सितंबर माह तक लंबित प्रोत्साहन एवं पारितोषिक राशि का भुगतान नहीं किया गया, तो वे सामूहिक रूप से हड़ताल करने को मजबूर होंगी।कार्यकर्ताओं ने राज्य स्वास्थ्य विभाग और सरकार से मामले में हस्तक्षेप करते हुए लंबित भुगतान की जांच कराकर जल्द राशि जारी करने की मांग की है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस आशा कार्यकर्ता के माध्यम से सरकार गांव-गांव तक स्वास्थ्य सेवाओं को पहुंचाने का दावा करती है, उसी कार्यकर्ता की मेहनत की राशि महीनों तक लंबित क्यों है? चांदन की आशा कार्यकर्ताओं की यह शिकायत अब केवल स्थानीय समस्या नहीं, बल्कि ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था और महिला स्वास्थ्य कर्मियों के भुगतान से जुड़ा बड़ा सवाल बनती जा रही है।











