
जनप्रतिनिधियों एवं पदाधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से बैठक, स्वच्छता, सैनिटाइजेशन, डी-वाटरिंग और जनजागरूकता पर विशेष जोर
खगड़िया। बाढ़ का पानी कम होने के बाद उत्पन्न होने वाली संभावित चुनौतियों और जनसुरक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर जिला प्रशासन ने पोस्ट-फ्लड गतिविधियों पर विशेष निगरानी शुरू कर दी है। इसी क्रम में जिलाधिकारी विक्रम विरकर की अध्यक्षता में जनप्रतिनिधियों एवं संबंधित पदाधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक आयोजित की गई। बैठक में बाढ़ के बाद किए जाने वाले कार्यों की विस्तृत समीक्षा की गई और संबंधित अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों की भूमिका तथा जिम्मेदारियों को स्पष्ट किया गया।

बैठक में जिलाधिकारी ने कहा कि बाढ़ का पानी उतरना राहत एवं बचाव कार्यों की समाप्ति नहीं, बल्कि पोस्ट-फ्लड चरण की शुरुआत है। इस दौरान जलजमाव, दूषित पानी, संक्रमण, सर्पदंश, डूबने की घटनाओं सहित स्वास्थ्य एवं जनसुरक्षा से जुड़े कई जोखिम सामने आ सकते हैं। ऐसे में प्रभावित क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने और समय रहते आवश्यक कार्रवाई करने की जरूरत है।

जिलाधिकारी ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में साफ-सफाई एवं स्वच्छता सुनिश्चित करने, जरूरत के अनुसार ब्लीचिंग पाउडर और चूना का छिड़काव कराने तथा जलजमाव वाले क्षेत्रों में पानी की निकासी के लिए डी-वाटरिंग की व्यवस्था करने का निर्देश दिया। इसके साथ ही माइकिंग के माध्यम से लगातार लोगों को जागरूक करने और संध्या चौपाल आयोजित कर ग्रामीणों से सीधे संवाद स्थापित करने पर भी जोर दिया गया।

जिले में पोस्ट-फ्लड स्वच्छता एवं सैनिटाइजेशन का कार्य लगातार जारी है। अब तक जिले में कुल 2,435 किलोग्राम ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव किया जा चुका है। सभी प्रखंडों को आवश्यकता के अनुसार ब्लीचिंग पाउडर एवं चूना उपलब्ध कराया गया है, ताकि प्रभावित क्षेत्रों में स्वच्छता और संक्रमण की रोकथाम से जुड़े कार्यों को तेजी से पूरा किया जा सके।
नगर परिषद क्षेत्र में जलजमाव वाले स्थानों पर डी-वाटरिंग के साथ मच्छर एवं अन्य कीटजनित जोखिमों को कम करने के लिए डिफॉगिंग भी लगातार कराई जा रही है। संबंधित स्थानीय निकायों को प्रभावित इलाकों में नियमित साफ-सफाई एवं आवश्यकता के अनुसार सैनिटाइजेशन कराने का निर्देश दिया गया है।
बैठक में संध्या चौपाल एवं माइकिंग के माध्यम से लोगों को बाढ़ के बाद खुले जलस्रोतों, गड्ढों और जलजमाव वाले क्षेत्रों में जाने से बचने के लिए जागरूक करने को कहा गया। विशेष रूप से बच्चों को ऐसे स्थानों से दूर रखने तथा डूबने की घटनाओं की रोकथाम के लिए लगातार जनजागरूकता अभियान चलाने पर जोर दिया गया। लोगों को सर्पदंश की घटनाओं के प्रति भी सावधान करने और सर्पदंश होने की स्थिति में तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेने के लिए जागरूक करने का निर्देश दिया गया।
जिलाधिकारी ने संबंधित पदाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि पोस्ट-फ्लड गतिविधियां केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि प्रत्येक प्रभावित क्षेत्र में इनका वास्तविक और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। जनप्रतिनिधियों से भी अपने-अपने क्षेत्रों में लोगों को जागरूक करने तथा स्थानीय समस्याओं और आवश्यकताओं से संबंधित फीडबैक प्रशासन तक पहुंचाने की अपील की गई।
बैठक में बाढ़ प्रभावित परिवारों के सामान्य जनजीवन की बहाली के साथ स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं जनसुरक्षा से जुड़े संभावित जोखिमों की समय रहते पहचान कर उनके निराकरण पर विशेष जोर दिया गया। इसके लिए विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय, क्षेत्रीय स्तर पर लगातार निगरानी और जरूरत पड़ने पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
जिला प्रशासन की ओर से पोस्ट-फ्लड चरण में प्रभावित आबादी की सुरक्षा और सामान्य जनजीवन की बहाली को प्राथमिकता देते हुए स्वच्छता, स्वास्थ्य, जनजागरूकता एवं आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई को लगातार जारी रखने पर जोर दिया जा रहा है।






