
रिपोर्ट:- उमाकांत पोद्दार।
चांदन/कटोरिया/बांका:- दूरदराज के स्वास्थ्य उपकेंद्रों पर कार्यरत एएनएम एवं सीएचओ को बायोमैट्रिक उपस्थिति दर्ज कराने के लिए निर्धारित स्वास्थ्य संस्थान अथवा मुख्यालय में आने के निर्देश के बाद स्वास्थ्यकर्मियों का विरोध सामने आया है। मंगलवार को विभिन्न स्वास्थ्य उपकेंद्रों पर कार्यरत एएनएम एवं सीएचओ ने कार्य बहिष्कार कर कटोरिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में धरना दिया और विरोध-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान स्वास्थ्यकर्मियों ने सामूहिक रूप से अपना पक्ष रखते हुए वर्तमान व्यवस्था को लेकर अपनी परेशानी बताई। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि उनके कार्यस्थल और निर्धारित स्वास्थ्य संस्थान के बीच काफी दूरी है। कुछ स्वास्थ्य उपकेंद्र मुख्यालय से करीब 40 से 45 किलोमीटर तक दूर हैं। ऐसी स्थिति में प्रतिदिन सुबह और शाम बायोमैट्रिक उपस्थिति दर्ज कराने के लिए लंबी दूरी तय करना उनके लिए व्यवहारिक रूप से काफी कठिन है। कर्मियों ने कहा कि वे अपने-अपने कार्यक्षेत्र में रहकर ग्रामीणों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराते हैं, इसलिए उन्हें केवल बायोमैट्रिक हाजिरी के लिए बार-बार मुख्यालय बुलाना उचित नहीं है।
कार्यस्थल पर ही हो बायोमैट्रिक उपस्थिति
विभिन्न स्वास्थ्य उपकेंद्रों पर कार्यरत एएनएम एवं सीएचओ ने इस संबंध में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. विनोद कुमार को सामूहिक हस्ताक्षरयुक्त आवेदन भी सौंपा। आवेदन में एएनएम ने बताया कि वे अपने-अपने कार्यक्षेत्र में रहकर ग्रामीणों को नियमित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराती हैं। कई कर्मियों के कार्यस्थल मुख्यालय से काफी दूर स्थित हैं।कर्मियों ने मांग की कि जिस स्वास्थ्य केंद्र में उनकी तैनाती है, वहीं बायोमैट्रिक उपस्थिति दर्ज कराने की व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए। उनका कहना है कि इससे विभागीय उपस्थिति भी दर्ज होगी और कर्मी अपने निर्धारित कार्यक्षेत्र में रहकर ग्रामीणों को स्वास्थ्य सेवाएं भी उपलब्ध करा सकेंगे।
40 से 45 किलोमीटर दूरी तय करना बताया मुश्किल
प्रदर्शनकारी एएनएम एवं सीएचओ के अनुसार कुछ स्वास्थ्य केंद्र मुख्यालय से करीब 40 से 45 किलोमीटर तक की दूरी पर हैं। ऐसे में प्रतिदिन इतनी लंबी दूरी तय कर बायोमैट्रिक उपस्थिति दर्ज कराने के बाद वापस कार्यस्थल पहुंचना और आवश्यकता पड़ने पर फिर मुख्यालय आना काफी कठिन होगा।कर्मियों ने कहा कि आने-जाने में न केवल अतिरिक्त समय लगेगा, बल्कि परिवहन पर अतिरिक्त खर्च भी होगा। सबसे बड़ी समस्या यह है कि स्वास्थ्यकर्मियों का काफी समय आने-जाने में ही बीत सकता है। इससे उनके निर्धारित कार्यक्षेत्र में उपलब्ध रहने का समय कम हो सकता है।
हाजिरी की भाग-दौड़ से स्वास्थ्य सेवा प्रभावित होने की आशंका
एएनएम ने आवेदन में कहा है कि उनका मुख्य दायित्व ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। गर्भवती महिलाओं की जांच, टीकाकरण, स्वास्थ्य जागरूकता, बच्चों एवं ग्रामीणों को आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने सहित कई कार्य उनके कार्यक्षेत्र में होते हैं।
कर्मियों का कहना है कि यदि उन्हें प्रतिदिन बायोमैट्रिक उपस्थिति के लिए दूर स्थित स्वास्थ्य संस्थान या मुख्यालय जाना पड़ेगा, तो उनके कार्यक्षेत्र में रहने का समय प्रभावित होगा। इससे ग्रामीणों को मिलने वाली नियमित स्वास्थ्य सेवाओं पर भी असर पड़ने की आशंका है।
व्यावहारिक समाधान निकालने की मांग
धरना एवं प्रदर्शन के दौरान एएनएम और सीएचओ ने स्पष्ट किया कि वे बायोमैट्रिक उपस्थिति व्यवस्था का विरोध मात्र नहीं कर रहे हैं, बल्कि ऐसी व्यवस्था की मांग कर रहे हैं जिससे उपस्थिति भी दर्ज हो और ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित न हों। उन्होंने संबंधित पदाधिकारी से मामले पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए तैनाती वाले स्वास्थ्य केंद्र पर ही बायोमैट्रिक मशीन अथवा उपस्थिति दर्ज कराने की सुविधा उपलब्ध कराने का अनुरोध किया।प्रदर्शन में एएनएम उमा भारती, नीलम कुमारी, माला कुमारी, किरण कुमारी, मीनू कुमारी, निशा, ब्यूटी, शशिकला, पूजा प्रीतम, नीतू भारती, प्रीति, वीणा कुमारी, कुमारी नूतन, बेबी कुमारी, आशा, पूनम, जूली जस्टिना बेसरा, प्रियंका, रामा, सुजाता, अर्चना, मंजू मुर्मू, काजल, रंभा, कंचन, शिल्पा भारती, इंदु समेत अन्य कर्मी शामिल थीं।वहीं सीएचओ गणपत लाल, दीपक कुमार, सुधीर कुमार शर्मा, राजेश, विश्वजीत, निशिकांत भारती, नितेश कुमार, पवन कुमार आदि ने भी प्रदर्शन में हिस्सा लिया। सभी ने सामूहिक रूप से अपना पक्ष रखते हुए मांग की कि बायोमैट्रिक उपस्थिति की व्यवस्था कर्मियों के वास्तविक तैनाती स्थल पर ही की जाए, ताकि उपस्थिति दर्ज कराने की प्रक्रिया के कारण ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित न हों।


CHANDAN NEWS: बायोमैट्रिक हाजिरी के







