
दैनिक बिहार पत्रिका, खगड़िया। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गुरुवार को शिक्षा विभाग से संबंधित विभिन्न योजनाओं, विद्यालयों की शैक्षणिक व्यवस्था, आधारभूत सुविधाओं और विद्यार्थियों से जुड़ी सेवाओं की विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में उप विकास आयुक्त, जिला शिक्षा पदाधिकारी, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के प्रधानाध्यापक/प्रधानाध्यापिका सहित शिक्षा विभाग के संबंधित पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित रहे।

बैठक में जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि विद्यालयों में केवल नामांकन और विद्यार्थियों की उपस्थिति सुनिश्चित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण और परिणामपरक शिक्षा उपलब्ध कराना शिक्षा व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य होना चाहिए। उन्होंने शिक्षकों की नियमित उपस्थिति, कक्षा संचालन, विद्यार्थियों के सीखने के स्तर, भाषा एवं गणित की मूलभूत दक्षता तथा कमजोर विद्यार्थियों को आवश्यक शैक्षणिक सहयोग उपलब्ध कराने की नियमित समीक्षा करने का निर्देश दिया।

कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में विषयवार शिक्षकों की उपलब्धता और रिक्तियों की भी समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि सभी KGBV में विषयवार रिक्तियों का आकलन कर आवश्यकता के अनुसार शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति की कार्रवाई की जाए, ताकि छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित नहीं हो और प्रत्येक विषय का नियमित एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षण सुनिश्चित किया जा सके।

भूमिहीन विद्यालयों के लिए उपलब्ध सरकारी भूमि की पहचान और सीमांकन की स्थिति की भी जानकारी ली गई। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को ऐसे विद्यालयों के लिए भूमि की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा सीमांकन की प्रक्रिया में तेजी लाने का निर्देश दिया, ताकि विद्यालयों में आवश्यक आधारभूत संरचना का विकास किया जा सके।
बैठक में ज्ञानदीप पोर्टल के माध्यम से विद्यार्थियों के नामांकन एवं प्रवेश की स्थिति की समीक्षा करते हुए पोर्टल पर दर्ज विवरण और वास्तविक विद्यालयी प्रवेश का समुचित सत्यापन करने का निर्देश दिया गया। प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने तथा इसकी नियमित समीक्षा सुनिश्चित करने को कहा गया। इसी तरह विद्यालयों में बाल पंजी के अद्यतन और व्यवस्थित संधारण पर भी जोर दिया गया। सभी विद्यार्थियों से संबंधित आवश्यक विवरण सही एवं अद्यतन रूप में दर्ज रखने तथा विद्यालय स्तर पर उसका नियमित सत्यापन करने का निर्देश दिया गया।
हाल में आई आपदा और जलजमाव के कारण प्रभावित विद्यालयों की स्थिति की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि परिस्थितियां सामान्य होते ही विद्यालयों का संचालन शीघ्र शुरू कराया जाए। जिन विद्यालय परिसरों में अभी पानी जमा है, वहां पंप के माध्यम से पानी की निकासी कर साफ-सफाई और सुरक्षा की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई लंबे समय तक बाधित न हो।
विद्यार्थियों के जन्म प्रमाण-पत्र और आधार कार्ड की उपलब्धता की भी समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि जिन विद्यार्थियों के पास आवश्यक दस्तावेज नहीं हैं, उनके दस्तावेज बनवाने के लिए संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर विशेष पहल की जाए, ताकि सरकारी योजनाओं और शैक्षणिक सेवाओं का लाभ लेने में बच्चों को परेशानी नहीं हो।
विद्यालयों में शैक्षणिक एवं सह-शैक्षणिक गतिविधियों को बेहतर दिशा देने के लिए विद्यालय हेतु मार्गदर्शक के चयन की प्रक्रिया के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश तैयार/जारी करने को कहा गया। चयन प्रक्रिया को स्पष्ट, पारदर्शी और उद्देश्यपरक रखने पर जोर दिया गया। इसके साथ ही District Resource Group (DRG) एवं District Programme Management Unit (DPMU) के गठन/चयन की भी समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक प्रक्रिया शीघ्र पूरी कर सक्षम एवं कार्यक्षम टीम गठित करने का निर्देश दिया, ताकि शिक्षा विभाग की योजनाओं की बेहतर मॉनिटरिंग और तकनीकी एवं प्रशासनिक सहायता सुनिश्चित हो सके।
बैठक में AXL (Assisted Language and Math Learning) से संबंधित पहल की भी समीक्षा हुई। विद्यार्थियों के भाषा और गणित के मूलभूत कौशल को मजबूत करने के लिए इस पहल को प्रभावी ढंग से लागू करने तथा विद्यालय स्तर पर इसके परिणामों की नियमित समीक्षा करने पर जोर दिया गया।
विद्यालयों में स्नेह समिति यानी माता समूह के गठन और प्रशिक्षण को लेकर भी निर्देश दिए गए। जिलाधिकारी ने समिति का शीघ्र गठन कर सदस्यों के प्रशिक्षण की योजना तैयार करने को कहा। इस पहल के तहत माताओं को विद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों से जोड़ा जाएगा। वे विद्यालय जाकर बच्चों के पठन-पाठन और सीखने की प्रगति का अनुश्रवण करेंगी तथा बच्चों की शैक्षणिक स्थिति को लेकर विद्यालय से समन्वय स्थापित करेंगी। इसका उद्देश्य समुदाय और अभिभावकों की भागीदारी बढ़ाकर बच्चों के सीखने के स्तर में सुधार करना है।
शिक्षकों के वेतन और अन्य लंबित वैध देयताओं के भुगतान की स्थिति की भी समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि वेतन और वैध देयताओं के भुगतान में अनावश्यक विलंब नहीं होना चाहिए तथा लंबित मामलों का नियमानुसार शीघ्र निष्पादन सुनिश्चित किया जाए।
बैठक में जिले में संचालित निजी विद्यालयों की प्रस्वीकृति/मान्यता की स्थिति पर भी चर्चा हुई। निजी विद्यालयों के लिए निर्धारित मानकों, आवश्यक आधारभूत संरचना, शैक्षणिक व्यवस्था और अन्य अनिवार्य शर्तों की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने सभी निजी विद्यालयों की जांच के लिए आवश्यक पत्र जारी कर नियमानुसार निरीक्षण कराने का निर्देश दिया। विद्यालयों द्वारा निर्धारित मानकों का अनुपालन किया जा रहा है या नहीं, इसकी भी जांच करने को कहा गया।
जिलाधिकारी ने सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि उनके क्षेत्र में कोई भी निजी विद्यालय आवश्यक प्रस्वीकृति/मान्यता के बिना संचालित नहीं हो। सभी निजी विद्यालयों की स्थिति का सत्यापन करते हुए प्रस्वीकृति की वैधता, निर्धारित मानकों के अनुपालन और विद्यालय संचालन से संबंधित आवश्यक दस्तावेजों की जांच करने को कहा गया। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।
बैठक में जिला स्तरीय विद्यालय खेल प्रतियोगिता-2026 की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि जिला स्तरीय विद्यालय खेल प्रतियोगिता का आयोजन निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 29 सितंबर से 1 अक्टूबर 2026 तक कराया जाए। प्रतियोगिता के दौरान खिलाड़ियों के पंजीकरण, खेल मैदानों की तैयारी, आवश्यक खेल सामग्री, तकनीकी पदाधिकारियों एवं निर्णायकों की उपलब्धता, सुरक्षा सहित अन्य सभी व्यवस्थाएं समय पर पूरी करने का निर्देश दिया गया।
वहीं सभी प्रखंडों में प्रखंड स्तरीय विद्यालय खेल प्रतियोगिता का आयोजन 26 एवं 27 सितंबर 2026 को निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार कराने का निर्देश दिया गया। प्रखंड स्तर पर निर्धारित खेलों में अधिक से अधिक विद्यार्थियों की सहभागिता सुनिश्चित करने और प्रतियोगिता को व्यवस्थित एवं पारदर्शी तरीके से संपन्न कराने को कहा गया।
जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि प्रत्येक प्रखंड में प्रखंड स्तरीय विद्यालय खेल प्रतियोगिता के लिए संबंधित प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (BEO) नोडल पदाधिकारी होंगे। BEO विद्यालयों, शिक्षकों, खेल प्रभारियों और आयोजन से जुड़े अन्य पदाधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कर प्रतियोगिता की सभी तैयारियां समय पर पूरी कराएंगे तथा आयोजन की नियमित मॉनिटरिंग करेंगे।
जिलाधिकारी ने विशेष रूप से कहा कि जिले का कोई भी विद्यालय खेल गतिविधियों से बाहर नहीं रहना चाहिए। सभी BEO अपने-अपने प्रखंड के प्रत्येक विद्यालय से विद्यार्थियों की निर्धारित खेल प्रतियोगिताओं में सहभागिता सुनिश्चित करेंगे। इसके लिए विद्यालयवार सहभागिता सूची तैयार कर उसकी समीक्षा की जाएगी। यदि किसी विद्यालय द्वारा बिना उचित कारण खेल प्रतियोगिता में सहभागिता सुनिश्चित नहीं की जाती है तो संबंधित विद्यालय अथवा जिम्मेदार पदाधिकारी के विरुद्ध नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि विद्यालय खेल प्रतियोगिताओं का उद्देश्य केवल प्रतियोगिता आयोजित करना नहीं, बल्कि अधिक से अधिक विद्यार्थियों को खेल गतिविधियों से जोड़ना, उनकी प्रतिभा की पहचान करना और उन्हें जिला एवं उच्चतर स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करना है। सभी विद्यालय प्रधानों, शारीरिक शिक्षा शिक्षकों और संबंधित कर्मियों को विद्यार्थियों को प्रेरित कर खेल प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करने का निर्देश दिया गया।
बैठक के अंत में जिलाधिकारी ने सभी संबंधित पदाधिकारियों को शिक्षा विभाग की योजनाओं और कार्यों की नियमित समीक्षा एवं प्रभावी अनुश्रवण सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने विद्यालय स्तर से सामने आने वाली समस्याओं का त्वरित समाधान करते हुए शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और परिणामोन्मुख बनाने पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया। जिलाधिकारी ने कहा कि विद्यालय बच्चों के सर्वांगीण विकास का प्रमुख केंद्र हैं, इसलिए आधारभूत सुविधाओं, शिक्षक उपलब्धता, नियमित पठन-पाठन, अभिभावक सहभागिता और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सभी पहलुओं पर समान रूप से ध्यान देते हुए जिले की शैक्षणिक व्यवस्था को और सुदृढ़ किया जाना आवश्यक है।








