
बांका। ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने, स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने और जीविका से जुड़ी योजनाओं को धरातल पर उतारने को लेकर बांका जिला प्रशासन ने सख्ती दिखाई है। बुधवार को जिलाधिकारी अंशुल अग्रवाल की अध्यक्षता में बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समिति यानी जीविका के अंतर्गत संचालित विभिन्न योजनाओं, आजीविका गतिविधियों और निर्धारित लक्ष्यों की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक में योजनाओं की रफ्तार तेज करने, लंबित कार्यों को पूरा करने और बेहतर परिणाम सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया। समीक्षा बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने जीविका के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए चलाए जा रहे कार्यक्रमों की बिंदुवार जानकारी ली। इसमें प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना यानी पीएमएफएमई, कृषि आधारित उद्यम, पशुपालन, वित्तीय समावेशन, स्वयं सहायता समूहों का बैंक लिंकेज और ऋण वितरण जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल रहे। इसके साथ ही जीविका दीदियों द्वारा संचालित ग्राहक सेवा केंद्रों, बकरी पालन की गतिविधियों तथा पशु सखियों के माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही सेवाओं की प्रगति की भी समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने संबंधित पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि योजनाओं का लाभ जरूरतमंद महिलाओं तक पहुंचाने के लिए जमीनी स्तर पर कार्यों में तेजी लाई जाए। बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान जीविका दीदियों को प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना से जोड़ने की स्थिति पर भी चर्चा हुई। वहीं, मनरेगा के सहयोग से संचालित नर्सरी, एकीकृत कृषि क्लस्टर के तहत तैयार कार्ययोजना, कृषि गतिविधियों के क्रियान्वयन और अन्य आजीविका कार्यक्रमों की उपलब्धियों तथा लंबित कार्यों की समीक्षा की गई। बैंक ऋण वितरण और पीएमएफएमई के लक्ष्य में अपेक्षित प्रगति नहीं होने पर जिलाधिकारी ने नाराजगी जताते हुए जवाबदेही तय की। बैंक ऋण निकासी में अपेक्षाकृत कम प्रगति को लेकर चांदन के प्रखंड परियोजना प्रबंधक से स्पष्टीकरण मांगा गया। वहीं, प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना के निर्धारित लक्ष्य में असंतोषजनक प्रगति पर बौंसी के प्रखंड परियोजना प्रबंधक से भी जवाब-तलब किया गया। दोनों को लंबित लक्ष्यों को जल्द पूरा करने का निर्देश दिया गया। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि योजनाओं की प्रगति केवल कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसका वास्तविक लाभ ग्रामीण परिवारों और जीविका दीदियों तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने लंबित कार्यों की पहचान कर योजनाबद्ध तरीके से उनका निष्पादन करने, नियमित निगरानी रखने और संबंधित प्रखंडों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर बल दिया। बैठक का एक महत्वपूर्ण पहलू जीविका दीदियों की सफलता की कहानियों को आम लोगों तक पहुंचाने से जुड़ा रहा। जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि सोशल मीडिया के माध्यम से ऐसी महिलाओं की उपलब्धियों को प्रमुखता से प्रचारित किया जाए, जिन्होंने कृषि, पशुपालन, सूक्ष्म उद्यम, बैंकिंग सेवाओं और अन्य आजीविका गतिविधियों के जरिए अपनी आर्थिक स्थिति में सकारात्मक बदलाव लाया है। उन्होंने कहा कि जीविका से जुड़ने के बाद महिलाओं की आय, आर्थिक आत्मनिर्भरता और सामाजिक स्थिति में आए बदलाव को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जाना चाहिए। इससे ग्रामीण क्षेत्रों की अन्य जरूरतमंद महिलाओं को प्रेरणा मिलेगी और वे भी स्वरोजगार अपनाकर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ सकेंगी। बैठक में जीविका, बांका के जिला परियोजना प्रबंधक राकेश कुमार, प्रबंधक कृषि चंदन कुमार, प्रबंधक पशुधन मनीष कुमार, प्रबंधक सूक्ष्म वित्त जय कुमार तथा प्रबंधक वैकल्पिक बैंकिंग एवं बीमा माज़ अख्तर सहित जिले के सभी प्रखंडों के प्रखंड परियोजना प्रबंधक उपस्थित रहे। कुल मिलाकर, बांका में जीविका योजनाओं की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने स्पष्ट संदेश दिया कि निर्धारित लक्ष्यों को समय पर पूरा करना, महिलाओं को योजनाओं का वास्तविक लाभ दिलाना और सफल आजीविका मॉडलों का प्रचार-प्रसार करना प्रशासन की प्राथमिकता है। अब संबंधित प्रखंडों में योजनाओं की प्रगति और स्पष्टीकरण के बाद होने वाली कार्रवाई पर नजर रहेगी।









