
जीविका दीदियों ने घर-घर पहुंचकर ग्रामीणों को किया जागरूक, स्वच्छ एवं सुंदर समसपुर बनाने का लिया संकल्प

दैनिक बिहार पत्रिका। समसपुर (खगड़िया)। लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान (द्वितीय चरण) के तहत ‘स्वच्छता ही सेवा’ कार्यक्रम के अंतर्गत ग्राम पंचायत राज समसपुर के वार्ड संख्या 12 में विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व स्वच्छता पर्यवेक्षक गणेश कुमार ने किया। इस दौरान ग्रामीणों को स्वच्छता, कचरा पृथक्करण और चार रंग के डस्टबिन के उपयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।

कार्यक्रम में जीविका दीदियों के सहयोग से ग्रामीणों को बताया गया कि अब घरों से निकलने वाले कचरे को अलग-अलग श्रेणियों में रखा और उठाया जाना जरूरी है। कचरे का स्रोत पर ही पृथक्करण करने से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को बेहतर बनाने के साथ-साथ जैविक कचरे से खाद तैयार करने में भी सुविधा होगी।
जागरूकता अभियान के दौरान चार रंग के डस्टबिन के उपयोग की जानकारी देते हुए बताया गया कि हरा डस्टबिन गीले एवं जैविक कचरे के लिए है। इसमें सब्जी और फलों के छिलके, बचा हुआ भोजन, चायपत्ती, खराब फल-सब्जियां, गोबर तथा पेड़-पौधों के पत्ते जैसे सड़ने वाले कचरे को डाला जाएगा। इस कचरे से WPU यानी अपशिष्ट प्रसंस्करण इकाई में जैविक खाद बनाने की प्रक्रिया की जाएगी।
नीले डस्टबिन में सूखा और रिसाइकिल होने वाला कचरा रखा जाएगा। इसमें प्लास्टिक, पॉलीथिन, कागज, गत्ता, पुराने कपड़े, प्लास्टिक की बोतलें और टूटे खिलौने आदि शामिल हैं। वहीं काले डस्टबिन में कांच, शीशा, लोहा, तार, बल्ब, पुराने इलेक्ट्रॉनिक सामान और बैटरी जैसे अजैविक, धातु एवं इलेक्ट्रॉनिक कचरे को रखने की जानकारी दी गई।
इसी तरह लाल डस्टबिन में हानिकारक और सेनेटरी कचरा रखा जाएगा। इसमें इस्तेमाल किए गए बैंडेज, सुई, सिरिंज, ब्लेड, बच्चों के डायपर और सेनेटरी पैड आदि शामिल हैं। ऐसे कचरे के निपटान में विशेष सावधानी बरतने की जानकारी ग्रामीणों को दी गई।
कार्यक्रम में जीविका की सीएम मधुबाला दीदी, शबनम दीदी, स्वच्छता कर्मी रेणु देवी, किशो देवी, उपेन्द्र राम, पप्पू राम सहित दर्जनों जीविका दीदियां मौजूद रहीं। जीविका दीदियों ने ग्रामीणों के बीच पहुंचकर घर-घर स्वच्छता का संदेश दिया और कचरे को अलग-अलग रखने के लिए जागरूक किया।
स्वच्छता पर्यवेक्षक गणेश कुमार ने ग्रामीणों से अपील की कि सभी परिवार अपने घरों में चारों डस्टबिन का अनिवार्य रूप से उपयोग करें और कचरा उठाव कर्मी को कचरा अलग-अलग करके ही दें। उन्होंने कहा कि गीले और सूखे कचरे को एक साथ मिलाने से जैविक खाद तैयार करने में परेशानी होती है और गांव में गंदगी भी बढ़ती है।
कार्यक्रम के अंत में ग्रामीणों ने स्वच्छ एवं सुंदर समसपुर बनाने का संकल्प लिया और घर से ही कचरे को अलग-अलग रखने तथा स्वच्छता व्यवस्था में सहयोग करने की बात कही।






