
बौंसी/बांका। बिहार और झारखंड को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण भागलपुर-हंसडीहा राष्ट्रीय राजमार्ग एनएच-133ई पर स्थित भलजोर पुल की बदहाल स्थिति अब राहगीरों के लिए बड़ी चिंता बनती जा रही है। पुल की सुरक्षा को लेकर प्रशासनिक निरीक्षण और निर्देश दिए जाने के बावजूद 25 अक्टूबर तक वैकल्पिक डायवर्सन का निर्माण पूरा नहीं हो सका है। दूसरी ओर, भारी वाहनों को रोकने के लिए लगाई गई बैरिकेडिंग भी टूट चुकी है। ऐसे में पत्थर हटाकर भारी वाहनों के पुल से गुजरने की सूचना ने दुर्घटना की आशंका को और गंभीर बना दिया है। करीब तीन दशक पुराने बताए जा रहे इस पुल की स्थिति लंबे समय से चिंता का विषय बनी हुई है। पुल के तीन पिलरों में से दो सीमेंट के पिलरों में दरार और क्षति दिखाई देने की बात सामने आई है। तीसरा पिलर बड़े चट्टानी पत्थर पर टिका हुआ बताया जाता है। इसके अलावा पुल की रेलिंग भी कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त है। स्थानीय लोगों का कहना है कि रेलिंग के कई हिस्से करीब डेढ़ वर्ष से टूटे हुए हैं। पुल के निचले हिस्से में भी क्षति दिखाई देती है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी अंशुल अग्रवाल ने 29 सितंबर को संबंधित अधिकारियों के साथ पुल का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान पुल की सुरक्षा और आवश्यक व्यवस्था को लेकर निर्देश दिए गए थे। इसके बाद 3 अक्टूबर को कटोरिया विधायक पूरनलाल टुडू और इंजीनियरों ने भी डायवर्सन निर्माण कार्य का जायजा लिया। बावजूद इसके, निर्माण की गति में अपेक्षित तेजी नहीं दिख रही है। जानकारी के अनुसार, डायवर्सन का निर्माण 4 अक्टूबर से शुरू हुआ था, लेकिन 25 अक्टूबर तक काम अधूरा रहा। यानी तीन सप्ताह से अधिक समय बीतने के बाद भी वैकल्पिक रास्ता तैयार नहीं हो पाया है। इससे रोजाना इस मार्ग से गुजरने वाले यात्रियों, वाहन चालकों और मालवाहक वाहनों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
टूटी बैरिकेडिंग, फिर पुल पर पहुंच रहे भारी वाहन
पुल की जर्जर स्थिति को देखते हुए भारी वाहनों की आवाजाही रोकने के लिए बैरिकेडिंग की गई थी। लेकिन स्थानीय लोगों के मुताबिक, बैरिकेडिंग टूट जाने के बाद कुछ भारी वाहन पत्थर हटाकर पुल से गुजर रहे हैं। इससे सवाल उठ रहा है कि जब पुल की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई जा चुकी है, तो प्रतिबंधित आवाजाही पर प्रभावी नियंत्रण क्यों नहीं हो पा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि भारी वाहनों के गुजरने के दौरान पुल में कंपन महसूस होता है। ऐसे में पुल की मौजूदा स्थिति को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को सख्ती से लागू करना बेहद जरूरी है। लोगों को आशंका है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो किसी गंभीर हादसे की स्थिति पैदा हो सकती है।
डायवर्सन के बाद भी स्थायी मरम्मत की चुनौती
भलजोर पुल भागलपुर, बांका और झारखंड के बीच आवागमन का महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। इस रास्ते से प्रतिदिन छोटी गाड़ियों के साथ बड़ी संख्या में मालवाहक और भारी वाहन गुजरते हैं। इसलिए पुल की खराब स्थिति का असर केवल स्थानीय लोगों पर ही नहीं, बल्कि अंतरराज्यीय यातायात पर भी पड़ सकता है। स्थानीय लोगों की मांग है कि भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक को प्रभावी तरीके से लागू किया जाए, डायवर्सन निर्माण कार्य में तेजी लाई जाए और पुल की स्थायी मरम्मत जल्द शुरू कराई जाए। उनका कहना है कि पहले वैकल्पिक मार्ग तैयार करना और तब तक सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना प्राथमिकता होनी चाहिए। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि डायवर्सन कब तक पूरा होगा, जर्जर पुल पर भारी वाहनों की आवाजाही कब प्रभावी रूप से रोकी जाएगी और स्थायी मरम्मत का काम कब शुरू होगा। फिलहाल, भलजोर पुल की सुरक्षा और अधूरे डायवर्सन को लेकर स्थानीय लोगों की चिंता बनी हुई है।



