*पांच लाख रुपये मांगने का आरोप, मुखिया और पूर्व पंचायत सचिव समेत चार पर प्राथमिकी दर्ज*
खगड़िया/परबत्ता प्रखंड क्षेत्र में शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करने वाला एक मामला सामने आया है। कन्या प्राथमिक विद्यालय सलारपुर के प्रधान शिक्षक पंकज पासवान को निलंबन मुक्त होने के बावजूद विद्यालय में योगदान नहीं कराया गया। शिक्षक ने योगदान कराने के नाम पर पांच लाख रुपये मांगने का आरोप भरसो पंचायत के मुखिया, पूर्व पंचायत सचिव समेत चार लोगों पर लगाया है। मामले में न्यायालय के माध्यम से थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। इधर, लंबे समय से विद्यालय में योगदान नहीं मिलने के कारण शिक्षक और उनका परिवार आर्थिक तंगी से गुजर रहा है। न्याय की उम्मीद में पीड़ित शिक्षक को न्यायालय का चक्कर लगाना पड़ रहा है।
*मां की तबीयत बिगड़ने पर विद्यालय से गए थे शिक्षक*
दर्ज मामले के अनुसार, सलारपुर गांव निवासी पंकज पासवान की वर्ष 2005 में पंचायत नियोजन इकाई भरसो के माध्यम से शिक्षा मित्र के पद पर कन्या प्राथमिक विद्यालय सलारपुर में नियुक्ति हुई थी। उन्होंने बताया कि वह नियमित रूप से अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे थे। इसी बीच 25 मई 2022 को उनकी मां की तबीयत अचानक बिगड़ गई। मां के इलाज के लिए वह आनन-फानन में विद्यालय से चले गए। इसी दौरान मानसी प्रखंड के बीआरसी, पीएम और परबत्ता के बीईओ ने विद्यालय का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान मध्याह्न भोजन योजना बंद पाई गई। इसकी रिपोर्ट जिला शिक्षा पदाधिकारी, खगड़िया को भेजी गई। रिपोर्ट के आधार पर 19 जुलाई 2022 को उन्हें निलंबित कर दिया गया।
*निलंबन मुक्त होने के बाद भी नहीं मिला योगदान*
पंकज पासवान के अनुसार, निलंबन अवधि में उन्हें किसी अन्य विद्यालय में कार्यस्थल नहीं दिया गया। उन्होंने बताया कि विभाग ने 30 दिसंबर 2022 को उन्हें निलंबन मुक्त कर दिया। इसकी सूचना तीन जनवरी 2023 को संबंधित पंचायत नियोजन इकाई को भी भेज दी गई थी। इसके बावजूद उन्हें विद्यालय में योगदान नहीं कराया गया। शिक्षक का आरोप है कि योगदान कराने के नाम पर पांच लाख रुपये की मांग की गई। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
*जांच में जुटी पुलिस, अधिकारियों ने झाड़ा पल्ला*
*थानाध्यक्ष प्रमोद कुमार ने बताया कि मामले में प्राथमिकी दर्ज कर जांच-पड़ताल की जा रही है।*
*पंचायत नियोजन इकाई के सचिव प्रफुल कुमार ने कहा कि उन्हें विभाग की ओर से अब तक कोई पत्र नहीं मिला है और उन्हें मामले की जानकारी नहीं है।*
*प्रभारी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी रजनीश कुमार ने कहा कि इस मामले में पंचायत नियोजन इकाई ही कुछ कर सकती है। उनके कार्यालय से कुछ नहीं किया जा सकता है।*
ऐसे में सवाल उठता है कि निलंबन मुक्त होने के बाद भी शिक्षक को विद्यालय में योगदान क्यों नहीं कराया गया और उनकी समस्या का समाधान कब होगा?
दैनिक बिहार पत्रिका गुरुदेव कुमार परबत्ता।




