*डस्टबिन और सफाई व्यवस्था के दावों के बीच मासूमों के हाथों में थमाई गई कचरे की जिम्मेदारी, बीडीओ ने जांच कर कार्रवाई का दिया भरोसा*
खगड़िया/गोगरी प्रखंड क्षेत्र मे लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान के तहत गांवों को स्वच्छ और सुंदर बनाने के सरकारी दावों की हकीकत पंचायत राज पसराहा में कुछ और ही नजर आ रही है। यहां स्वच्छता कर्मियों की जगह छोटे-छोटे बच्चों से कचरा उठवाए जाने का मामला सामने आया है। बुधवार को पसराहा गांव के वार्ड संख्या 05, 10, 11 और 12 में बच्चों को कचरा उठाते हुए देखा गया। इस घटना ने पंचायत की सफाई व्यवस्था और जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत के सभी वार्डों में स्वच्छता कर्मियों की तैनाती की गई है, लेकिन आधे से अधिक कर्मी नियमित रूप से ड्यूटी पर नहीं आते हैं। इसके कारण विभिन्न वार्डों में जगह-जगह कचरे का अंबार लगा हुआ है। नालियों की नियमित सफाई नहीं होने से दुर्गंध फैल रही है और लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि जिन नन्हे हाथों में कलम, कॉपी और किताबें होनी चाहिए, उन्हीं हाथों से कचरा उठवाया जा रहा है। सवाल है कि आखिर बच्चों के अभिभावक किन परिस्थितियों में उन्हें इस काम के लिए भेजने को मजबूर हैं? क्या पंचायत में सफाई व्यवस्था की जिम्मेदारी अब बच्चों के कंधों पर डाल दी गई है?
ग्रामीणों ने पंचायत सचिव की कार्यशैली पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि वे सफाई कर्मियों की नियमित उपस्थिति और कामकाज पर उचित निगरानी नहीं रखते हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
मामले में गोगरी के प्रखंड विकास पदाधिकारी ने बताया कि शिकायत संज्ञान में आई है। जांच कराई जाएगी और दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध जल्द कार्रवाई की जाएगी।
अब देखना यह है कि प्रशासन की जांच केवल आश्वासन तक सीमित रहती है या वास्तव में पंचायत की सफाई व्यवस्था सुधरती है और बच्चों को कचरा उठाने की मजबूरी से मुक्ति मिलती है।
दैनिक बिहार पत्रिका परबत्ता संवाददाता गुरुदेव कुमार।





