
डहुआ पंचायत के वार्ड-14 में दस स्थानों पर लाइट लगाने की बात, लेकिन इसी वार्ड के बैदाचक गांव में एक भी नहीं; शिकायत के बाद भी लाभ नहीं मिलने से उठ रहे सवाल
बौंसी/बांका:- गांवों की गलियों और सार्वजनिक स्थानों को रात में रोशन करने के उद्देश्य से शुरू की गई मुख्यमंत्री ग्रामीण सोलर स्ट्रीट लाइट योजना का लाभ बौंसी प्रखंड के कुछ गांवों तक अब भी नहीं पहुंचने की शिकायत सामने आ रही है। ऐसा ही मामला डहुआ पंचायत के वार्ड संख्या-14 अंतर्गत बैदाचक गांव का है, जहां ग्रामीणों का कहना है कि अब तक गांव में एक भी सोलर स्ट्रीट लाइट नहीं लगाई गई है। ग्रामीणों के अनुसार इस संबंध में पंचायत प्रतिनिधियों के साथ प्रखंड स्तर के अधिकारियों को भी जानकारी दी गई, लेकिन गांव को योजना का लाभ मिलने का इंतजार अब तक खत्म नहीं हुआ है। इसे लेकर ग्रामीणों में नाराजगी के साथ यह सवाल भी है कि जब आसपास के क्षेत्रों में सोलर लाइट लगाई जा चुकी हैं तो बैदाचक गांव इससे क्यों वंचित है।
वार्ड में दस लाइट, लेकिन बैदाचक के हिस्से एक भी नहीं
इस संबंध में पंचायत सचिव से बातचीत किए जाने पर उन्होंने वार्ड संख्या-14 में दस स्थानों पर सोलर स्ट्रीट लाइट लगाए जाने की बात स्वीकार की। लेकिन इसी वार्ड के अंतर्गत आने वाले बैदाचक गांव में अब तक एक भी लाइट नहीं लगने की बात सामने आने के बाद योजना के चयन और वितरण को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। दूसरी ओर पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि पंचायत स्तर पर उपलब्ध कराई गई सोलर स्ट्रीट लाइटों को निर्धारित स्थानों पर लगाया जा चुका है। ऐसे में सवाल यह है कि उपलब्ध लाइटों से वंचित रह गए गांवों और टोलों के लिए आगे क्या व्यवस्था की जाएगी।
ग्रामीणों ने उठाया समान सुविधा का सवाल
बैदाचक के ग्रामीण चाहते हैं कि संबंधित विभाग एवं पंचायत स्तर पर यह स्पष्ट किया जाए कि गांव को योजना में कब शामिल किया जाएगा। उनका कहना है कि सरकारी योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में सार्वजनिक रोशनी की व्यवस्था बेहतर करना है तो इसका लाभ छूटे हुए गांवों तक भी पहुंचना चाहिए। ग्रामीणों का आरोप है कि मामले की जानकारी दिए जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस पहल धरातल पर दिखाई नहीं दी है। ऐसे में वे प्रशासन से गांव की स्थिति का स्थलीय सत्यापन कराने और आवश्यकता के अनुसार सोलर स्ट्रीट लाइट उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं।
योजना की प्रगति और धरातल की स्थिति पर सवाल
राज्य स्तर पर योजना की व्यापक प्रगति के दावों के बीच बैदाचक जैसे गांव का वंचित रहना स्थानीय स्तर पर समीक्षा की जरूरत को सामने ला रहा है। सवाल यह भी है कि जिन गांवों या टोलों में निर्धारित संख्या में लाइट नहीं पहुंची, उनकी पहचान और शेष कार्य को पूरा करने की व्यवस्था कब होगी। फिलहाल बैदाचक के ग्रामीणों की निगाहें पंचायत और प्रशासन पर टिकी हैं। वे जानना चाहते हैं कि वार्ड के दूसरे स्थान सोलर लाइट से रोशन हो चुके हैं तो बैदाचक गांव का अंधेरा कब दूर होगा?











