
अनुसूचित जाति-जनजाति के जनप्रतिनिधियों ने रखीं क्षेत्र की बुनियादी समस्याएं; वासगीत पर्चा से लेकर आवासीय विद्यालय, छात्रावास और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं तक दी गई जानकारी
बांका:- कहीं सड़क और नाले की जरूरत, कहीं पेयजल-बिजली की समस्या तो कहीं आवास, जमीन और सामुदायिक भवन की मांग। अनुसूचित जाति एवं जनजाति बहुल क्षेत्रों से जुड़ी ऐसी कई समस्याएं मंगलवार को जिला प्रशासन के समक्ष पहुंचीं। समाहरणालय सभागार में जिला पदाधिकारी अंशुल अग्रवाल की अध्यक्षता में हुई बैठक में SC-ST वर्ग के जनप्रतिनिधियों ने अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याएं रखीं। जिला कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति के प्रभारी मंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल के निर्देश के आलोक में आयोजित बैठक में प्राप्त आवेदनों पर डीएम ने संबंधित विभागों को त्वरित एवं नियमानुसार कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
सड़क से सिंचाई तक सामने आईं जरूरतें
बैठक में जनप्रतिनिधियों ने आवास योजना, विद्यालय भवन, ग्रामीण सड़क, जमीन विवाद, विवाह भवन, नाला, सिंचाई, PCC सड़क, सामुदायिक भवन, चापाकल, नल-जल, बिजली, स्ट्रीट लाइट, शौचालय, पुल और आंगनबाड़ी केंद्र से संबंधित समस्याएं एवं मांगें रखीं। डीएम ने संबंधित मामलों को विभागवार देखते हुए नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा। इसका उद्देश्य स्थानीय स्तर की बुनियादी जरूरतों से जुड़े आवेदनों को संबंधित विभाग तक पहुंचाकर उनके समाधान की प्रक्रिया आगे बढ़ाना है।

वासगीत पर्चा चाहिए तो आवेदन की पावती जरूर लें
उप विकास आयुक्त ने बैठक में विभिन्न विकासात्मक योजनाओं की जानकारी दी। वासगीत पर्चा से जुड़े मामलों में संबंधित अंचलाधिकारी के पास आवेदन देने और आवेदन की पावती प्राप्त करने की प्रक्रिया भी जनप्रतिनिधियों को समझाई गई। इस जानकारी पर विशेष जोर इसलिए दिया गया, ताकि आवेदन करने वाले व्यक्ति के पास उसका आधिकारिक रिकॉर्ड रहे और मामले की आगे की प्रक्रिया का पता लगाया जा सके।
अत्याचार निवारण से छात्रावास तक की मिली जानकारी
जिला कल्याण पदाधिकारी ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण, आवासीय विद्यालय, छात्रावास, सामाजिक सुरक्षा पेंशन तथा सामुदायिक भवन सह वर्क शेड सहित कल्याण विभाग की विभिन्न योजनाओं और प्रावधानों की जानकारी दी। बैठक में उप विकास आयुक्त, जिला कल्याण पदाधिकारी तथा सभी प्रखंडों के प्रखंड कल्याण पदाधिकारी मौजूद रहे। बैठक का फोकस केवल समस्याएं सुनने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जनप्रतिनिधियों से प्राप्त आवेदनों को संबंधित विभागों तक पहुंचाकर नियमानुसार कार्रवाई और स्थानीय जरूरतों को विकास योजनाओं से जोड़ने पर रहा।










