Breaking News, पटना। हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व हैं। यह तिथि पितरों को समर्पित है। लोकमान्यता है कि इस दिन पितरों का तर्पण और पिंड दान, श्राद्ध करने से सभी मनोरथ सिद्ध होते हैं और पितर सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करते हैं। वैशाख माह में जलका दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती हैं। दादी मंदिर भागलपुर के विक्की पंडा ने बताया कि वैशाख अमावस्या तिथि की शुरुआत 7 मई मंगलवार को सुबह 11:42 बजे हो जाएगी और अगले दिन यानी 8 मई बुधवार को सुबह 8 बजकर 52 मिनट तक रहेगी।
ऐसे में अमावस्या तिथि दो दिन मनाई जाएगी। इसमें पितृ संबंधित कार्यों के लिए 7 मई मंगलवार का दिन शास्त्र सम्मत रहेगा। इस दिन अमृत सर्वार्थ सिद्धि योग और आयुष्मान योग भी रहेगा। इस दिन पितरों का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए पितृ दोष निवारण स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। पितरों के लिए तर्पण जल सफेद फूल और काले तिल से करना चाहिए। इसके बाद पितरों के लिए पिंडदान, श्राद्धकर्म सुबह 11:55 से दोपहर 2 बजे के बीच में करना श्रेष्ठ रहेगा। विक्की पंडा के अनुसार इस बार वैशाख मास के श्रीकृष्ण पक्ष की अमावस्या उदियात तिथि को आधार मानते हुए 8 मई बुधवार को सर्वार्थ सिद्धि योग और सौभाग्य योग में मनाई जाएगी। इस दिन देवताओं से संबंधित कार्य करना चाहिए। देवकार्य बुधवार को सुबह 5:43 से 8:52 बजे तक करना श्रेष्ठ है।
Author: दैनिक बिहार पत्रिका
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