मोतिहारी में फर्जी सिपाही बनकर 10 दिन तक करता रहा ड्यूटी, 4 लाख की ठगी का शिकार निकला युवक

नियुक्ति पत्र नहीं, आईडी नहीं, फिर भी वर्दी पहनकर स्टेशन पर करता रहा ड्यूटी; पुलिस जांच में खुला बड़ा फर्जीवाड़ा

मोतिहारी। बिहार के मोतिहारी से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पुलिस प्रशासन को भी हैरान कर दिया। बापूधाम मोतिहारी रेलवे स्टेशन पर एक युवक पिछले 10 दिनों से पुलिस की वर्दी पहनकर सिपाही बनकर ड्यूटी कर रहा था, लेकिन उसके पास न नियुक्ति पत्र था, न पहचान पत्र और न ही किसी प्रकार का प्रशिक्षण। जांच में खुलासा हुआ कि वह कोई शातिर अपराधी नहीं, बल्कि सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर 4 लाख रुपये की ठगी का शिकार हुआ है।

गिरफ्तार युवक की पहचान पवन कुमार के रूप में हुई है, जो राजेपुर थाना क्षेत्र के स्माइल गांव का निवासी है। जानकारी के अनुसार, पवन पहले महाराष्ट्र में मजदूरी करता था। इसी दौरान उसकी मां की मुलाकात हरेंद्र राम नामक व्यक्ति से हुई। उसने खुद को प्रभावशाली बताते हुए दावा किया कि पटना सचिवालय में उसकी पहुंच है और वह 4 लाख रुपये लेकर बिहार पुलिस में सिपाही की नौकरी दिला सकता है।

झांसे में आए परिवार ने आरोपी को 1 लाख रुपये ऑनलाइन और 3 लाख रुपये नकद दे दिए। इसके बाद ठगों ने पवन को पुलिस की वर्दी उपलब्ध कराई और बताया कि उसकी पोस्टिंग बापूधाम रेलवे स्टेशन पर हो गई है। युवक ने बिना किसी संदेह के अगले ही दिन से स्टेशन पर ड्यूटी शुरू कर दी।

संदेह होने पर खुला राज

लगातार वर्दी में स्टेशन परिसर में घूम रहे युवक पर यात्रियों और स्टेशन कर्मियों को शक हुआ। सूचना मिलने पर नगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और युवक से नियुक्ति पत्र, पहचान पत्र तथा अन्य दस्तावेज मांगे। जब वह कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका, तो पुलिस उसे हिरासत में लेकर थाने ले गई।

पूछताछ के दौरान सामने आया कि पवन को पूरा विश्वास था कि उसकी सरकारी नौकरी लग चुकी है। उसने पुलिस को बताया कि उसने नौकरी के लिए चार लाख रुपये दिए थे और उसे विधिवत पोस्टिंग मिलने की बात कहकर स्टेशन पर ड्यूटी करने भेजा गया था।

ठगों की तलाश में जुटी पुलिस

टाउन डीएसपी दिलीप कुमार ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह मामला नौकरी दिलाने के नाम पर बड़े फर्जीवाड़े और ठगी का प्रतीत हो रहा है। पुलिस उन लोगों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए छापेमारी कर रही है, जिन्होंने युवक से पैसे लेकर फर्जी नियुक्ति का झांसा दिया।

पुलिस का मानना है कि इस पूरे मामले के पीछे एक संगठित गिरोह सक्रिय हो सकता है, जो बेरोजगार युवाओं को सरकारी नौकरी का झांसा देकर लाखों रुपये की ठगी करता है। मामले की गहन जांच जारी है।

रिपोर्ट: दैनिक बिहार पत्रिका

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