सुपौल। जिले के जदिया थाना क्षेत्र में पुलिस के रवैये को लेकर लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। आरोप है कि थाना अध्यक्ष नंदकिशोर नंदन ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 126 का गलत इस्तेमाल करते हुए कई निर्दोष लोगों पर झूठे मुकदमे थोप दिए हैं। इससे आमजन मानसिक और आर्थिक दोनों रूप से परेशान हैं।
धारा 126 के तहत सामान्यतः उन लोगों पर कार्रवाई की जाती है जो मतदान प्रक्रिया के दौरान शांति व्यवस्था भंग करने की संभावना रखते हों। लेकिन जदिया पुलिस पर आरोप है कि बिना किसी ठोस कारण और साक्ष्य के कई निर्दोष लोगों को इस धारा में फंसा दिया गया है। पुलिस द्वारा चौकीदार के माध्यम से बैक डेट में नोटिस भेजे जा रहे हैं और बांड पेपर पर हस्ताक्षर करवाए जा रहे हैं — मानो खुद पुलिस ही मजिस्ट्रेट बन बैठी हो।
एक मामले में तो चौकीदार द्वारा भेजा गया नोटिस 16 अक्टूबर 2025 को मिला, जबकि उसमें उपस्थित होने की तारीख 11 अक्टूबर 2025 दी गई थी। इससे साफ है कि पुलिस प्रशासनिक प्रक्रिया का मज़ाक बना रही है।
स्थानीय लोगों और बुद्धिजीवियों ने बताया कि जिन लोगों का समाज में कभी किसी से विवाद तक नहीं हुआ, उन्हें भी “बवाल करने वाला” बताकर नोटिस भेजे जा रहे हैं। वहीं, असली अपराधी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। इससे लोगों में भय और असंतोष दोनों बढ़ रहा है।
जनता का कहना है कि “यदि यही पुलिस व्यवस्था रही तो यह आम जनता के अधिकारों और कानून की भावना, दोनों के साथ अन्याय होगा।”
लोगों ने उच्च अधिकारियों से मांग की है कि जदिया थाना क्षेत्र में इस पूरे प्रकरण की जांच कर निष्पक्ष कार्रवाई की जाए।
रिपोर्ट: पप्पू आलम, दैनिक बिहार पत्रिका
Author: दैनिक बिहार पत्रिका
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