प्रधान सेवक के नौ साल और सौ सीधी मुलाकात …

Dr. Amit Kumar Mishra

३,अक्टूबर,२०१४ भारतीय लोकतंत्र का एक ऐसा ऐतिहासिक दिन हैं उस दिन पहली बार किसी देश के प्रधान मंत्री का उस देश की जनता के साथ सीधा संवाद हुआ था। यह भारतीय डिजिटलाइजेशन का बेहतर प्रमाण है। ‘प्रधानसेवक’ प्रधानमंत्री शब्द का एक पर्यायवाची शब्द कहा जा सकता है जिसे पहली बार किसी देश के प्रधानमंत्री ने शायद हिंदी शब्दकोष में जोड़ा हैं और अपने पहले जनता के साथ किए गए संवाद में स्वीकार किया कि मैं आपके बीच का एक आम आदमी या जनसेवक हूँ और विश्वास दिलाता हूँ कि कभी आपका यह सेवक आपसे दूर नही रहेंगा। ‘मन की बात’ का यह शतकीय एपिसोड इस बात की गवाही हैं।

साथ ही यह कार्यक्रम राष्ट्र पिता के सपनों से भी इत्तेफ़ाक रखता है जिसमें राष्ट्र पिता महात्मा गाँधी जी की एक बात चरितार्थ होती है, जिस पर वो हमेशा जोर दिया करते थें कि कोई भी राष्ट्र तभी विकसित हो सकता हैं। जब देश का प्रत्येक व्यक्ति किसी न किसी माध्यम से एक छत के नीचे एक साथ बैठें और सवालों पर मंथन कर समस्या का समाधान निकालने का प्रयास करें और कुछ ऐसा ही एक प्रधान सेवक के द्वारा पिछलें नौ सालों से लागातार किया जा रहा हैं।

जिसका मुख्य उद्देश सशक्त और शक्तिशाली राष्ट्र निर्माण करना है। संचार एवं शोध का विद्यार्थी होनें के नाते मेरे लिए इस बात को समझना और समझाना बेहद आसान है कि प्रधानमंत्री जी द्वारा रेडियों को ही संवाद का साधन क्यों चुना गया। वह इसलिए कि यह साधन अपने आप में बेहद परिपूर्ण और सुलभ है। शोध में भी इस बात की पुष्टि की गई हैं कि समाजिक सह सम्बन्ध विकसित करने से समस्या का समुचित समाधान मुमकिन और आसन होता हैं जिसमें संचार की जरूरत होती हैं और इस कार्य के लिए रेडियों उपयुक्त साधन है। लोगों का मानना हैं कि प्रधानमंत्री द्वारा लोगों से सीधा संवाद में रेडियों पर करोड़ों रुपये खर्च कियें गयें लेकिन एक कहावत है कि बात करने से ही बात बनती है जिसके लिए किसी माध्यम से संवाद आवश्यक हैं।

इस संवाद का एक अपना खास उद्देश हैं। अपने पहले मुलाकात में प्रधानमंत्री जी ने गाँधी जी के विचारों को आत्मसात कर ‘ स्वच्छ भारत मिशन’ से पुरे देश की जनता को जोड़ने का प्रयास किया जिसमें आज इन्हें बहुत हद तक सफल मिली। जिसका कारण यह हैं कि एक प्रधान सेवक ने इसकी पहल स्वयं अपने आप से की और दूसरों से करने का आह्वान भी किया एक खुले मंच से किया चुकिं पिछले दिनों “मन की बात” का सौवां एपिसोड हुआ जिसमें उन्होंने अपना सनातनी परिचय देते हुए “चैरेवेति चैरेवेति चैरेवेति” वैदिक शब्द का उच्चारण कर यह साबित किया और बताया कि किसी कार्य को अंजाम तक पहुंचाने में निरंतरता कितनी आवश्यक हैं।

यहां एक बात तो साफ है कि निरंतर चलते रहना और प्रयासरत रहना हर समस्या का समाधान मुमकिन करता हैं। अभी तक इस कार्यक्रम की खास बात यह हैं कि यह पूर्ण रूप से गैर राजनीतिक हैं। जहां आम लोगों से केवल उनकी समस्या की बात होती हैं। दुसरी ओर इस कार्यक्रम की सबसे खास बात यह है कि इसमें उनकी बात होती हैं जिनसे हमारा युवा वर्ग अनजान होता हैं। कार्यक्रम के जरिये युवाओं को अपने अतीत से जोड़कर नए भविष्य का मार्ग प्रशस्त करने हेतु प्रेरित किया जाता है ताकि स्वस्थ विचारों का जन्म हो साथ ही प्रगतिशील और उन्नत भारत का निर्माण हो सकें।

गौरतलब है कि यहां अभी तक केवल उन सब मुद्दों पर चर्चा की गई हैं जिससे आज देश का एक खास वर्ग प्रतिदिन दो-दो हाथ करता हैं। कार्यक्रम की सकारात्मकता का पता इस बात से आसानी से लगाया जा सकता हैं कि आज केवल भारत ही नही पूरा विश्व रेडियों के माध्यम से भारत को सुनता हैं यहाँ की गई बातें युवाओं के सामने उत्त्पन उनके समस्याओं का पूर्ण समाधान भी मुहैया कराता। इस कार्यक्रम में कई ऐसे अविस्मर्णीय किस्सों पर चर्चा की गई है। जिसें युवा पीढ़ी ने अपने आप से विरमित कर दिया था। इसके माध्यम से उसकी पुनरावृति की जाती हैं ताकि युवा जोश हमेशा जागृत रहें और भारत पुन: विश्व गुरु बनकर अपनी प्रतिष्ठा प्राप्त कर सकें।

Dr. Amit Kumar Mishra
डॉ अमित कुमार मिश्रा असिस्टेंट प्रोफेसर पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग गोपाल नारायण सिंह विश्वविद्यालय

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