बेलदौर/खगड़िया। बेलदौर प्रखंड क्षेत्र के सुदूरवर्ती गांवों को जोड़ने वाली उसराहा-चौढ़ली-इतमादी जिमिंदारी बांध सह पथ की बदहाल स्थिति स्थानीय लोगों के लिए गंभीर परेशानी का कारण बन गई है। सड़क पर बने बड़े-बड़े गड्ढे, रेनकट और किनारे खड़े पेड़ों की सड़क की ओर झुकी टहनियां राहगीरों के लिए खतरा बन चुकी हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से अविलंब सड़क की मरम्मत और सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने की मांग की है।
स्थानीय लोगों के अनुसार कोसी क्षेत्र की महत्वपूर्ण सड़क मानी जाने वाली यह मार्ग बीपी मंडल सेतु के उसराहा चौक से डुमरी बाजार होते हुए इतमादी गांव तक जाती है। इस सड़क से प्रतिदिन हजारों लोग आवागमन करते हैं, लेकिन लंबे समय से मरम्मत नहीं होने के कारण सड़क की हालत अत्यंत जर्जर हो चुकी है। कई स्थानों पर रेनकट बनने से सड़क टूट गई है और गहरे गड्ढों में तब्दील हो गई है, जिससे वाहन चालकों को जान जोखिम में डालकर यात्रा करनी पड़ रही है।
ग्रामीणों ने बताया कि हाल ही में आए तेज आंधी-तूफान के कारण सड़क किनारे लगे कई बड़े पेड़ों की मोटी टहनियां सड़क की ओर झुक गई हैं। इससे सड़क की चौड़ाई कम हो गई है और दो वाहनों के एक साथ गुजरने में भी कठिनाई हो रही है। खासकर बाइक और साइकिल सवारों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि रात के समय और बरसात के मौसम में यह मार्ग और अधिक खतरनाक हो जाता है। अंधेरे में झुकी हुई टहनियां दिखाई नहीं देतीं, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। कई बार वाहन चालक टहनियों से बचने के प्रयास में असंतुलित होकर गिर चुके हैं।
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि सड़क की बदहाल स्थिति को लेकर कई बार संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों का ध्यान आकृष्ट कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है।
ग्रामीणों ने बताया कि यह मार्ग इतमादी, चौढ़ली, बलैठा सहित एक दर्जन से अधिक गांवों और टोले-मुहल्लों के लोगों की जीवनरेखा है। स्कूली छात्र, किसान, व्यापारी और आम नागरिक इसी सड़क के सहारे अपने दैनिक कार्यों के लिए आवागमन करते हैं। इसके बावजूद सड़क की अनदेखी लोगों में नाराजगी पैदा कर रही है।
ग्रामीणों ने यह भी चिंता जताई कि यह सड़क जिमिंदारी बांध पर बनी हुई है। कोसी नदी में लाल पानी का प्रवाह शुरू होने के साथ ही संभावित कटाव और बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। ऐसे में बांध की सुरक्षा और सड़क की मजबूती दोनों अत्यंत आवश्यक हैं। लेकिन संबंधित विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस तैयारी या निगरानी दिखाई नहीं दे रही है।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन एवं संबंधित विभाग से मांग की है कि सड़क पर बने रेनकट और गड्ढों की तत्काल मरम्मत कराई जाए, सड़क किनारे झुकी हुई पेड़ों की टहनियों की छंटाई की जाए तथा जिमिंदारी बांध की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाए, ताकि क्षेत्र के लोगों को सुरक्षित और सुगम आवागमन की सुविधा मिल सके।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले मानसून के दौरान स्थिति और गंभीर हो सकती है, जिससे लोगों की मुश्किलें कई गुना बढ़ जाएंगी।
रिपोर्ट: दैनिक बिहार पत्रिका, खगड़िया
Author: दैनिक बिहार पत्रिका
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