खगड़िया जिले में 11 से 16 वर्ष की उम्र के बच्चे तेजी से सुलेशन नशे के शिकार हो रहे हैं। यह उम्र जहां किताबों से ज्ञान अर्जित करने और खेल-कूद में भाग लेने की होती है, वहीं नशे की इस लत ने उनकी जिंदगी को अंधकारमय बना दिया है।
स्टेशन, रेलवे पटरी, वीरान हवेलियां और खंडहर बने अड्डे
खासकर रेलवे स्टेशन और पटरी के किनारे कचरा बीनने वाले बच्चे, साथ ही ग्रामीण इलाकों के अच्छे घरों के बच्चे भी इस जानलेवा नशे में लिप्त पाए जा रहे हैं। ये बच्चे वीरान हवेलियों, खंडहरों और सुनसान जगहों पर जाकर सुलेशन सूंघते हैं और नशे में डूब जाते हैं।
बिना रोक-टोक बिक रहा सुलेशन
स्थानीय दुकानों पर सनफिक्स नामक सुलेशन ₹15 से ₹50 में आसानी से मिल रहा है, जिसे बच्चे खरीदकर काले प्लास्टिक में डालकर नशे के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके सेवन से उनका मानसिक संतुलन बिगड़ जाता है, सोचने-समझने की शक्ति कमजोर हो जाती है और शारीरिक विकास रुक जाता है।
इन इलाकों के बच्चे सबसे ज्यादा शिकार
खगड़िया जिले के अलौली, बेलदौर, परबत्ता और गोगरी क्षेत्रों में यह नशा तेजी से पैर पसार रहा है। कई बार रेलवे विभाग और पुलिस की कार्रवाई में बच्चों को सुलेशन पीते हुए पकड़ा गया है, जिन्हें बाल सुधार गृह भेज दिया जाता है।
अभिभावकों की लापरवाही बनी जानलेवा
चौंकाने वाली बात यह है कि अभिभावकों को इस लत की जानकारी होने के बावजूद वे इसे गंभीरता से नहीं लेते। नतीजतन, कई बच्चों की जिंदगी बर्बाद हो रही है, और कुछ की हालत इतनी बिगड़ जाती है कि वे मौत के मुंह में समा जाते हैं।
समाज और प्रशासन की भूमिका जरूरी
इस गंभीर समस्या को रोकने के लिए प्रशासन को सुलेशन की अवैध बिक्री पर सख्ती बरतनी होगी, साथ ही अभिभावकों और समाज को भी जागरूक होकर बच्चों की सही दिशा में मार्गदर्शन करने की जरूरत है। अन्यथा, यह नशा कई और मासूम जिंदगियों को तबाह कर सकता है।
दैनिक बिहार पत्रिका/रिपोर्ट: मो. साजिद
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