कोर्ट का आदेश नहीं, फिर भी बुलडोजर लेकर पहुंची पुलिस – पीड़िता ने उच्चस्तरीय जांच की मांग की
सुपौल। जिले के त्रिवेणीगंज प्रखंड अंतर्गत कोरियापट्टी पश्चिम वार्ड-10 में जदिया पुलिस की दबंगई और कानून से खिलवाड़ का सनसनीखेज मामला सामने आया है। बिना किसी सक्षम प्राधिकार या न्यायालय के आदेश के एक मुस्लिम महिला जरीना खातून के घर पर पुलिस बल और बुलडोजर लेकर हमला कर दिया गया।
पीड़ित के अनुसार, 12 बजे दिन में कुलानंद यादव हथियारों से लैस 50 लोगों के साथ जरीना खातून के घर पहुंचा और जेसीबी से घर तोड़ने लगा। हैरानी की बात यह है कि जदिया थाना एसआई दशरथ चौहान के नेतृत्व में दो दर्जन पुलिसकर्मी इस कार्रवाई में शामिल थे। जब पीड़िता ने पुलिस से कारण पूछा तो गालियां, धक्का-मुक्की और जान से मारने की धमकी दी गई। जेसीबी ने दरवाजे पर बड़े-बड़े गड्ढे खोद दिए, घर का टट्टी गिरा दिया और कई पेड़-पौधों को नष्ट कर दिया।
पुलिस की हरकतों से सवालों के घेरे में प्रशासन
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस कार्रवाई के लिए न तो कोई कोर्ट का आदेश था, न ही कोई मजिस्ट्रेट मौके पर मौजूद था। पुलिस ने बिना किसी आधिकारिक निर्देश के महिला के पुश्तैनी मकान पर बुलडोजर चला दिया, जो न्यायिक प्रक्रिया का खुला उल्लंघन है।
घटना की सूचना मिलते ही जब वरीय अधिकारियों तक मामला पहुंचा, तो पुलिस आनन-फानन में जेसीबी और गुंडों के साथ वहां से भाग निकली। यह पूरी घटना एक वीडियो में रिकॉर्ड हुई, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है।
थाना प्रभारी के रवैये पर उठे गंभीर सवाल
इस मामले में जब जदिया पुलिस से पुछा गया, तो थाना प्रभारी राजीव कुमार गोलमोल जवाब देने लगे। उन्होंने कहा कि “सीओ द्वारा जमीन की मापी कराई गई थी,” लेकिन जब अतिक्रमण हटाने को लेकर आदेश की प्रति मांगी गई तो उन्होंने कोई ठोस जवाब नहीं दिया।
अगर अधिकृत मापी हुई थी, तो गृहस्वामी को पहले नोटिस क्यों नहीं दिया गया? क्यों नहीं न्यायिक प्रक्रिया का पालन किया गया? क्या पुलिस को कानून से ऊपर समझा जाए?
पीड़िता की गुहार – दोषी पुलिसकर्मियों पर हो कड़ी कार्रवाई
पीड़िता जरीना खातून ने अनुमंडल पदाधिकारी और अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी को आवेदन देकर दोषी पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि “जदिया पुलिस ने पैसे लेकर इस अवैध कार्रवाई को अंजाम दिया है, जिससे पुलिस विभाग की छवि धूमिल हो रही है।”
अब सवाल यह है कि क्या सुपौल पुलिस अधीक्षक इस मामले में निष्पक्ष जांच कर दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई करेंगे, या फिर यह मामला भी अन्याय की भेंट चढ़ जाएगा? न्याय की उम्मीद में पीड़िता और उसके परिवार की नजरें प्रशासन पर टिकी हैं।
रिपोर्ट: दैनिक बिहार पत्रिका/ पप्पू आलम
Author: दैनिक बिहार पत्रिका
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