गोगरी में राशन घोटाले का भंडाफोड़: गरीबों का अनाज हड़प रहे डीलर, प्रशासन बेखबर!

अंगूठे का निशान लेकर राशन हड़पने का बड़ा खेल, कमीशनखोरी का आरोप, ग्रामीणों में भारी आक्रोश

गोगरी (खगड़िया)। गरीबों को मिलने वाले सरकारी अनाज पर खुलेआम डाका डाला जा रहा है! गोगरी प्रखंड में जन वितरण प्रणाली (PDS) के तहत अनाज वितरण में बड़े घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। ग्रामीणों की शिकायत के अनुसार, डीलर न केवल लाभुकों को कम राशन दे रहे हैं, बल्कि कई मामलों में अंगूठे का निशान लेने के बाद भी राशन नहीं दिया जा रहा। इस गड़बड़ी में अधिकारियों की मिलीभगत की आशंका भी जताई जा रही है।

कैसे चल रहा यह घोटाला?

पीड़ित लाभुकों के अनुसार, गोगरी प्रखंड में कई पंचायतों में डीलर खुलकर मनमानी कर रहे हैं। इस घोटाले का तरीका कुछ इस प्रकार है—
✔️ पहले लाभुक से अंगूठे का निशान लिया जाता है, जिससे सरकारी रिकॉर्ड में दिखाया जाए कि उसे राशन मिल गया।
✔️ कम अनाज दिया जाता है या कई बार बिल्कुल भी नहीं दिया जाता।
✔️ विरोध करने वालों को धमकाया जाता है और उनका नाम सूची से हटाने की धमकी दी जाती है
✔️ ऊपर तक कमीशन भेजने का खेल चल रहा है, जिससे कोई डीलर के खिलाफ बोलने की हिम्मत नहीं करता।

जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों का फूटा गुस्सा

इस घोटाले के खिलाफ प्रखंड प्रमुख अशोक कुमार पंत के नेतृत्व में अनुमंडल पदाधिकारी को एक लिखित शिकायत दी गई है। शिकायत में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि—
???? हर राशन डीलर की जांच हो और दोषियों पर कार्रवाई की जाए।
???? लाभुकों को पूरा अनाज मिले और नाम हटाने का खेल बंद हो।
???? घोटाले में शामिल अधिकारियों पर भी कड़ी कार्रवाई की जाए।
???? यदि जल्द समाधान नहीं हुआ, तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।

प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल!

अब बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस गड़बड़ी को रोकने के लिए कोई ठोस कदम उठाएगा या फिर यह मामला भी फाइलों में दफन हो जाएगा? शिकायत की प्रतिलिपि उप विकास आयुक्त और जिला पदाधिकारी को भी भेजी गई है, ताकि बड़े स्तर पर जांच हो सके।

क्या गरीबों को उनका हक मिलेगा या चलती रहेगी घोटालेबाजों की मनमानी?

यह मामला सिर्फ गोगरी प्रखंड तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे जिले में इस तरह की गड़बड़ियों की खबरें आती रही हैं। सवाल यह है कि क्या गरीबों के हक की इस लूट को रोका जाएगा, या फिर रसूखदार डीलरों और अधिकारियों की साठगांठ जारी रहेगी?

अब सबकी निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं। क्या दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी या यह मामला भी धीरे-धीरे ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?

रिपोर्ट: दैनिक बिहार पत्रिका 

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