मक्का, दूध, मछली और बिजली उत्पादन में अग्रणी खगड़िया को क्यों नहीं मिल रहा हक? सरपंच ने केंद्र तक पहुंचाई जिले की आवाज!
गोगरी (खगड़िया)। खगड़िया जिले के गोगरी प्रखंड स्थित ग्राम कचहरी रामपुर के सरपंच मो. नूर आलम ने दिल्ली पहुंचकर उपराष्ट्रपति के निजी सचिव डॉ. आलोक रंजन घोष से मुलाकात की और जिले के विकास से जुड़ी पांच अहम मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा। सरपंच नूर आलम ने खगड़िया की अनदेखी और बदहाली पर कड़ा सवाल उठाते हुए कहा कि खगड़िया एशिया का सबसे बड़ा मक्का उत्पादक जिला है, बिहार का ‘डेनमार्क’ कहलाता है, सात नदियों से घिरा है, लेकिन विकास की दौड़ में पिछड़ा हुआ क्यों है?
खगड़िया: अपार संभावनाओं के बावजूद उपेक्षा का शिकार!
सरपंच नूर आलम ने उपराष्ट्रपति के निजी सचिव को बताया कि खगड़िया जिला मक्का उत्पादन में एशिया महाद्वीप में अव्वल स्थान रखता है। लेकिन सरकार की अनदेखी के कारण मक्का आधारित उद्योगों का विकास नहीं हुआ। इस वजह से किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य नहीं मिलता और वे बिचौलियों के शिकार हो जाते हैं।
बिहार का डेनमार्क कहे जाने वाले खगड़िया में हर दिन लाखों लीटर दूध का उत्पादन होता है, खासकर A2 मिल्क और हाई-प्रोटीन दूध की जबरदस्त पैदावार होती है। लेकिन बाजार की कमी और उचित मूल्य न मिलने के कारण पशुपालकों को भारी नुकसान झेलना पड़ता है। अगर सरकार सही मार्केटिंग और प्रसंस्करण केंद्र की व्यवस्था करे, तो यह जिला बिहार का सबसे बड़ा डेयरी हब बन सकता है।
7 नदियां, लेकिन एक भी पनबिजली प्लांट नहीं!
खगड़िया सात नदियों से घिरा हुआ है, यह जल संसाधनों से भरपूर है। लेकिन आश्चर्यजनक रूप से, यहां एक भी पनबिजली प्लांट नहीं लगाया गया! सरपंच ने मांग की कि अगर सरकार इस पर ध्यान दे और जल शक्ति को ऊर्जा में बदले, तो हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा और जिले की तस्वीर बदल सकती है।
मछली पालन और केला उत्पादन में अग्रणी, लेकिन किसानों को नहीं मिलता सही मूल्य
खगड़िया बिहार के सबसे बड़े मछली उत्पादन वाले जिलों में से एक है, लेकिन सरकार की नीतियों की कमी के कारण इस क्षेत्र का सही विकास नहीं हो पाया। अगर मछली पालन को सही प्रोत्साहन मिले और निर्यात की व्यवस्था बने, तो यह जिला बिहार के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
इसी तरह, खगड़िया के कई प्रखंडों में केले की बड़ी पैदावार होती है, लेकिन बाजार और उचित मूल्य की कमी के कारण किसानों को उनकी मेहनत का लाभ नहीं मिल पाता। अगर केला उत्पादन के लिए विशेष कोल्ड स्टोरेज और प्रोसेसिंग यूनिट बनाए जाएं, तो किसान आत्मनिर्भर बन सकते हैं।
सरपंच ने उपराष्ट्रपति के सचिव को सौंपा ज्ञापन, बोले- “खगड़िया को उसका हक चाहिए!”
दिल्ली में उपराष्ट्रपति के निजी सचिव और खगड़िया के पूर्व डीएम डॉ. आलोक रंजन घोष से मुलाकात के दौरान सरपंच नूर आलम ने उन्हें गुलदस्ता और असम के प्रसिद्ध कामाख्या मंदिर का मिनी शॉल भेंट किया। इस मौके पर उन्होंने खगड़िया की अनदेखी को लेकर खुलकर अपनी बात रखी और कहा कि यह जिला प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर है, लेकिन सरकारी नीतियों की अनदेखी के कारण आज भी पिछड़ा हुआ है।
“खगड़िया का हक मिलना चाहिए!”
सरपंच ने कहा कि अगर इन पांच मांगों पर सरकार गंभीरता से विचार करे, तो खगड़िया विकास के नए आयाम स्थापित कर सकता है।
- मक्का आधारित उद्योगों की स्थापना
- दूध प्रसंस्करण और मार्केटिंग की बेहतर व्यवस्था
- पनबिजली प्लांट की स्थापना
- मछली पालन उद्योग का विस्तार
- केला उत्पादकों के लिए बाजार और प्रोसेसिंग यूनिट
सरपंच नूर आलम की मुलाकात रही सार्थक! जल्द मिलेगी राहत?
उपराष्ट्रपति के निजी सचिव डॉ. आलोक रंजन घोष ने कहा कि सरपंच द्वारा उठाई गई सभी मांगों को संबंधित मंत्रालयों और विभागों को भेजा जाएगा और इस पर संभावित कार्रवाई जल्द की जाएगी। सरपंच नूर आलम ने कहा कि यह मुलाकात सार्थक रही और उम्मीद है कि सरकार जल्द ही इन मांगों पर ध्यान देगी।
क्या अब खगड़िया के अच्छे दिन आएंगे?
सरपंच नूर आलम के इस प्रयास से खगड़िया के विकास की नई उम्मीद जगी है। अब देखना यह है कि सरकार इस पर कितना ध्यान देती है और कब तक इन मांगों को पूरा किया जाता है। अगर ये मांगें पूरी होती हैं, तो खगड़िया बिहार का सबसे विकसित जिला बन सकता है और किसानों को उनके हक का सही लाभ मिल सकता है।
खगड़िया की आवाज बनी नूर आलम की पहल, अब सरकार कब सुनेगी?
रिपोर्ट: कृष्णा टेकरीवाल, दैनिक बिहार पत्रिका
Author: दैनिक बिहार पत्रिका
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