हर चौथा बच्चा 8वीं के बाद छोड़ रहा स्कूल, झारखंड भी बिहार से आगे
बिहार, जो देश का तीसरा सबसे बड़ा राज्य है, आर्थिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन का दंश झेल रहा है। यहां औसत मासिक आय मात्र 5,028 रुपये है, जो देश में सबसे कम है। झारखंड, जो बिहार से अलग होकर नया राज्य बना, वह भी आय के मामले में बिहार से आगे निकल चुका है।
बिहार में हर चौथा बच्चा 8वीं के बाद स्कूल छोड़ देता है। यह आंकड़ा न केवल शिक्षा व्यवस्था की बदहाली को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि यहां बच्चों के पास उच्च शिक्षा के अवसर सीमित हैं। शिक्षा के अभाव में बेरोजगारी बढ़ती जा रही है और राज्य के युवा बड़ी संख्या में रोजगार की तलाश में अन्य राज्यों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं।
कमाई में बिहार सबसे पीछे, छोटे राज्यों से भी पिछड़ा
बिहार की प्रति व्यक्ति आय भारत के औसत से बहुत कम है। यहां एक व्यक्ति औसतन 5,028 रुपये महीना कमाता है, जबकि देश के अन्य राज्यों की स्थिति इस प्रकार है:
- दिल्ली: बिहार से 8 गुना अधिक
- सिक्किम: 10 गुना अधिक
- तेलंगाना: 6 गुना अधिक
- महाराष्ट्र और केरल: 5 गुना अधिक
- हिमाचल प्रदेश और आंध्र प्रदेश: 4 गुना अधिक
ये आंकड़े बिहार की विकास की हकीकत को बयां करते हैं। जब देश के अन्य राज्य तरक्की की ओर बढ़ रहे हैं, तब बिहार आज भी सबसे पिछड़ा हुआ है।
बिहार के पिछड़ेपन के कारण
- शिक्षा में गिरावट: स्कूल छोड़ने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। अच्छी शिक्षा के अभाव में युवाओं के पास रोजगार के अवसर सीमित हो रहे हैं।
- बेरोजगारी और पलायन: लाखों युवा रोजगार के लिए दिल्ली, पंजाब, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के राज्यों की ओर पलायन कर रहे हैं।
- सरकारी नीतियों की विफलता: बिहार में उद्योगों की कमी है, सरकारी योजनाएं कागजों तक सीमित रह जाती हैं और भ्रष्टाचार चरम पर है।
- बुनियादी सुविधाओं की कमी: सड़क, बिजली, स्वास्थ्य सेवाओं की हालत दयनीय बनी हुई है।
क्या यही है ‘विकसित बिहार’ का सपना?
राज्य सरकार ‘विकसित बिहार’ का दावा तो करती है, लेकिन हकीकत यह है कि बिहार कमाई, शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं के मामले में सबसे निचले पायदान पर खड़ा है। अगर सरकार ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाए, तो आने वाले वर्षों में स्थिति और भी भयावह हो सकती है।
बिहार को एक नई दिशा देने की जरूरत है – जहां शिक्षा मजबूत हो, रोजगार के अवसर बढ़ें और युवा अपने ही राज्य में खुशहाल जीवन जी सकें। सवाल यह है कि सरकार कब जागेगी?
रिपोर्ट: दैनिक बिहार पत्रिका
Author: दैनिक बिहार पत्रिका
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