विक्रमशिला विश्वविद्यालय का गौरव लौटेगा, मुख्य सचिव ने किया स्थल निरीक्षण

भागलपुर। प्राचीन भारतीय शिक्षा का प्रतिष्ठित केंद्र विक्रमशिला विश्वविद्यालय अब अपने स्वर्णिम अतीत की ओर वापस लौटेगा। आठवीं सदी में तंत्र विद्या के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध भागलपुर स्थित विक्रमशिला विश्वविद्यालय, जिसे बख्तियार खिलजी ने 12वीं सदी में नष्ट कर दिया था, अब पुनः जीवित होने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यहां केंद्रीय विश्वविद्यालय का निर्माण होगा, जिसकी कवायद तेज हो चुकी है।

केंद्र सरकार और राज्य सरकार की पहल
केंद्र सरकार ने 2015 में इस विश्वविद्यालय के निर्माण के लिए 500 करोड़ रुपये स्वीकृत किए थे। हाल ही में, राज्य सरकार ने भागलपुर जिले को 89 करोड़ रुपये की राशि भूमि अधिग्रहण के लिए दी है। विक्रमशिला के नजदीक स्थित कहलगांव में केंद्रीय विश्वविद्यालय का निर्माण कार्य जल्द शुरू होने की उम्मीद है।

मुख्य सचिव का निरीक्षण
बिहार सरकार के मुख्य सचिव अमृतलाल मीणा ने शुक्रवार को अपनी टीम के साथ विक्रमशिला विश्वविद्यालय के अवशेष स्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने 215 एकड़ भूमि की स्थिति और आसपास के परिवेश का जायजा लिया और अधिकारियों को निर्माण प्रक्रिया को लेकर दिशा-निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने भूमि अर्जन से पहले सोशल इंपैक्ट एसेसमेंट प्रक्रिया की समीक्षा भी की।

इतिहास में विक्रमशिला की अहमियत
विक्रमशिला विश्वविद्यालय की स्थापना 8वीं सदी में पाल वंश के राजा धर्मपाल ने की थी और यह नालंदा विश्वविद्यालय का समकालीन था। विशेष रूप से तंत्र विद्या और गुप्त विद्याओं में विशेषज्ञता के लिए यह प्रसिद्ध था। विक्रमशिला का शैक्षिक महत्त्व न केवल भारत, बल्कि विश्वभर में था। प्राचीन काल में यह नालंदा से भी अधिक प्रभावशाली था और नालंदा विश्वविद्यालय के प्रशासन को भी नियंत्रित करता था।

आधुनिक खुदाई और पुरातात्विक खोजें
विक्रमशिला के अवशेषों की खुदाई 1960 से 1969 तक पटना विश्वविद्यालय द्वारा की गई थी, इसके बाद भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण (ASI) ने 1972 से 1982 तक खुदाई की। इससे क्रॉस आकार का स्तूप, वर्गाकार विहार और कई स्तूप समूह के भग्नावशेष प्राप्त हुए थे। अब, 2024 से फिर खुदाई की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जिसमें महाविहार के आसपास कई और अवशेष मिले हैं।

प्रधानमंत्री की घोषणा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 फरवरी को भागलपुर में एक जनसभा में कहा था, “विक्रमशिला विश्वविद्यालय ज्ञान का वैश्विक केंद्र था, और अब इसके गौरव को पुनः स्थापित किया जाएगा। नालंदा विश्वविद्यालय की पुनर्स्थापना के बाद अब विक्रमशिला का भी पुनर्निर्माण किया जा रहा है।”

आर्थिक और सांस्कृतिक प्रभाव
मुख्य सचिव ने कहा कि विक्रमशिला के पुनरुद्धार से न केवल बिहार की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर को नई पहचान मिलेगी, बल्कि यह शिक्षा और पर्यटन के क्षेत्र में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। इस दौरान भागलपुर के एएसपी हृदयकांत, कहलगांव के डीएसपी कल्याण आनंद सहित कई अधिकारी मौके पर मौजूद थे।

नए युग की शुरुआत
यह परियोजना सिर्फ एक विश्वविद्यालय की स्थापना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बिहार की सांस्कृतिक धरोहर को पुनर्जीवित करने और आने वाली पीढ़ियों को शिक्षा के क्षेत्र में नई दिशा देने का एक महत्वपूर्ण कदम है। इस पुनर्निर्माण के साथ, विक्रमशिला फिर से ज्ञान और शोध का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा।

संभावना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जल्द ही इस परियोजना का शिलान्यास करेंगे और विक्रमशिला विश्वविद्यालय का गौरव एक बार फिर दुनिया के सामने होगा।

ब्यूरो रिपोर्ट, दैनिक बिहार पत्रिका 

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