गली-गली जलजमाव, चौक बना कचरे का डंपिंग ज़ोन, कचरे के ढेर के पास से स्कूल जाते हैं बच्चे
गोगरी (खगड़िया)। नगर परिषद क्षेत्र अंतर्गत वार्ड नंबर 12 की हालत बद से बदतर हो चुकी है। कोवाकोल रोड हो या कन्या मध्य विद्यालय वाली गली — हर जगह गंदे पानी का जमाव और कचरे का ढेर आम नज़ारा बन गया है। स्थिति इतनी भयावह है कि बाजार आने-जाने वाले लोग गंदे पानी से होकर गुजरने को मजबूर हैं, वहीं स्कूली बच्चों को भी नाली के ओवरफ्लो पानी और कूड़े के बीच से होकर स्कूल जाना पड़ता है।
यह तस्वीरें उसी सच्चाई को बयां करती हैं, जो गोगरी नगर परिषद की उदासीनता और प्रशासनिक निष्क्रियता की पोल खोलती हैं। स्थानीय निवासी बताते हैं कि यहां नाला तो है, लेकिन निकासी की कोई व्यवस्था नहीं है। परिणामस्वरूप नल का पानी और नाले का गंदा पानी सड़कों पर बहता रहता है। तेज़ बारिश हो या साधारण दिन — जलजमाव हमेशा बना रहता है।
तारा मध्य विद्यालय के सामने का इलाका हो या कन्या मध्य विद्यालय वाली गली — हर जगह पानी भरा रहता है और दुर्गंध से जीना दूभर हो चुका है। सबसे चिंताजनक स्थिति वार्ड नंबर 12 के चौक की है, जहां नगर परिषद द्वारा कोई डस्टबिन न बनाए जाने के कारण स्थानीय लोग सड़क पर ही कचरा फेंक देते हैं। यही नहीं, नगर परिषद की कचरा गाड़ी भी डोर टू डोर कचरा नहीं उठाती, बल्कि पूरे वार्ड का कचरा चौक पर ही डंप करती है और फिर वहां से ट्रैक्टर लगाकर उठाया जाता है। इससे सुबह के समय दो-दो घंटे तक जाम की स्थिति बन जाती है।
इतनी विकराल गंदगी और दुर्गंध के बीच भी अब तक न तो ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव होता है और न ही कीटनाशक दवाओं का प्रयोग। केवल तेज़ बारिश के बाद जब पानी सड़कों पर हद से ज्यादा भर जाता है, तब कहीं जाकर नगर परिषद की गाड़ी उसे उठाती है — लेकिन समस्या का समाधान तब भी नहीं होता।
साफ है कि गोगरी नगर परिषद स्वच्छता के प्रति गंभीर नहीं है। एक ओर जिलाधिकारी नवीन कुमार खुद शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाए रखने की अपील करते हैं, वहीं दूसरी ओर उनके ही जिले के गोगरी नगर परिषद क्षेत्र में हालात इतने खराब हैं कि नाले का पानी सड़कों पर बहता है और कचरे के ढेरों से स्वास्थ्य संकट गहराता जा रहा है।
यह स्थिति अब केवल नाराजगी की नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य के संकट की ओर इशारा कर रही है। सवाल यह है कि आखिर कब तक लोग इस गंदगी और अव्यवस्था के बीच जीने को मजबूर रहेंगे? क्या जिलाधिकारी नवीन कुमार इस समस्या को गंभीरता से लेकर गोगरी नगर परिषद की जवाबदेही तय करेंगे?
नगर परिषद की निष्क्रियता और वार्ड पार्षदों की चुप्पी अब गोगरीवासियों के लिए एक अभिशाप बन गई है। समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो यह समस्या किसी बड़े संक्रमण और जनविरोध का कारण बन सकती है।
रिपोर्ट: दैनिक बिहार पत्रिका, खगड़िया
Author: दैनिक बिहार पत्रिका
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