इमाम की विदाई पर नम हुईं आंखें, गांव में गूंजा जज़्बाती माहौल

गोगरी (खगड़िया)। रामपुर पूर्वी भाग जामा मस्जिद में सोमवार का दिन भावुक करने वाला रहा। 43 वर्षों से लगातार पिता-पुत्र के रूप में इमामत की सेवा निभाने वाले परिवार की विदाई पर गांव के लोग आंसुओं को रोक नहीं पाए।

धनरोजा गांव निवासी मो० फिरोज आलम को रामपुर जामा मस्जिद से सम्मानित विदाई दी गई। सैकड़ों लोगों ने फूल-मालाओं से स्वागत कर पूरे गांव का भ्रमण कराया। स्थानीय सरपंच नूर आलम ने बताया कि 43 वर्ष पूर्व यहां उनके पिता इमाम मो० सहामत नियुक्त हुए थे। बाद में उन्होंने शिक्षा विभाग में सरकारी नौकरी जॉइन की और अपने बड़े पुत्र फिरोज आलम को मस्जिद का इमाम बना दिया।

19 वर्षों तक इमामत करने के बाद पिता सहामत अली की बीमारी से मौत हो गई। इसके बाद अनुकंपा पर मो० फिरोज आलम को भी शिक्षा विभाग में नौकरी मिल गई। इस कारण सोमवार को उनका मस्जिद से औपचारिक विदाई दी गई।

मस्जिद सिक्योरिटी मो० जुनैद आलम ने कहा— “पिता-पुत्र की 43 साल की सेवाओं में मस्जिद ने इबादत और इंसानियत की मिसाल देखी। उनके जाने से पूरा गांव नम है, लेकिन वक्त के साथ आना-जाना चलता रहता है।”

मुखिया कृष्णानंद यादव ने कहा कि इमाम का कार्यकाल बेहद सराहनीय रहा। उनके जाने से गांव को गहरा मलाल है। इस मौके पर मो० अकबर अली, एजाज आलम, साजन आलम, मो० शरीफ उद्दीन, मो० नेहाल उद्दीन, डॉ० शहवाज आलम, वार्ड सदस्य इजहार आलम, अनवर अली, इमरान आलम समेत कई गणमान्य लोग मौजूद थे।

रिपोर्ट: दैनिक बिहार पत्रिका, खगड़िया 

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