‘मनोन्याय’ इकाई से लेकर ई-कोर्ट्स परियोजना तक, मुफ्त कानूनी सहायता और डिजिटल पहुंच को बनाया जा रहा मजबूत
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने दिव्यांगजनों सहित आम नागरिकों को सस्ती, गुणवत्तापूर्ण और त्वरित कानूनी सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण पहल की हैं। के तहत समाज के कमजोर वर्गों, विशेषकर दिव्यांगजनों को मुफ्त और सक्षम कानूनी सेवाएं प्रदान की जाती हैं।
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) द्वारा दिव्यांगजनों के लिए एक विशेष योजना लागू की गई है, जिसका नाम है। इस योजना का उद्देश्य मानसिक रूप से बीमार और बौद्धिक रूप से अक्षम व्यक्तियों की विशेष कानूनी एवं सामाजिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए संवेदनशील और प्रभावी कानूनी सहायता सुनिश्चित करना है।
केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री ने राज्यसभा में लिखित उत्तर में बताया कि इस योजना के अंतर्गत लद्दाख और दादरा एवं नगर हवेली को छोड़कर सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष ‘कानूनी सेवा इकाई’ स्थापित की गई हैं, जिन्हें ‘मनोन्याय’ (LSUM) कहा जाता है।
न्यायालयों की अवसंरचना को दिव्यांग अनुकूल बनाने पर जोर
सरकार जिला एवं अधीनस्थ न्यायालयों के लिए अवसंरचना विकास हेतु एक केंद्र प्रायोजित योजना भी चला रही है। इसके तहत न्यायालय भवन, न्यायिक अधिकारियों के आवास, वकीलों के कक्ष, डिजिटल कंप्यूटर कक्ष और शौचालय परिसरों का निर्माण किया जा रहा है। दिशानिर्देशों के अनुसार यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि सभी प्रस्तावित भवन दिव्यांगजनों के अनुकूल हों।
भवनों का डिज़ाइन तथा द्वारा निर्धारित अनिवार्य पहुंच मानकों के अनुरूप तैयार किया जा रहा है।
ई-कोर्ट्स परियोजना के तीसरे चरण में डिजिटल सुलभता पर फोकस
के तीसरे चरण में 24 प्रमुख घटक शामिल हैं, जिनका उद्देश्य दिव्यांगजनों सहित सभी नागरिकों के लिए मजबूत और सुलभ डिजिटल न्यायिक ढांचा तैयार करना है। इसके तहत दिव्यांगजनों के लिए सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए 27.54 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है।
इस पहल के अंतर्गत 752 न्यायालयों (उच्च न्यायालयों सहित) की वेबसाइटों को पर स्थानांतरित किया जाएगा। यह प्लेटफॉर्म सुरक्षित, स्केलेबल और सुगम्य वेबसाइट सेवा प्रदान करता है। इसमें आंशिक एवं पूर्ण दृष्टिबाधित व्यक्तियों के लिए सामग्री को आसानी से पढ़ने और उपयोग करने की विशेष सुविधा उपलब्ध है।
सरकार का मानना है कि इन पहलों से न्याय तक पहुंच को अधिक समावेशी बनाया जा सकेगा और दिव्यांगजनों को भी समान अधिकार एवं अवसर सुनिश्चित होंगे।
रिपोर्ट: दैनिक बिहार पत्रिका, डेस्क
Author: दैनिक बिहार पत्रिका
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