
चांदन/बांका:- चांदन प्रखंड क्षेत्र में जनवितरण प्रणाली (पीडीएस) दुकानों के माध्यम से लाभुकों को उपलब्ध कराए जा रहे खाद्यान्न की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। लाभुकों के अनुसार,पीडीएस दुकानों में पहुंच रहे गेहूं में सड़े-गले दानों के साथ मिट्टी मिली हुई है, वहीं चावल की गुणवत्ता को लेकर भी शिकायतें सामने आ रही हैं। स्थिति ऐसी बताई जा रही है कि कुछ उपभोक्ता इस अनाज को जानवरों के खाने योग्य भी नहीं मान रहे हैं।वहीं, पीडीएस दुकानदार भी दबे जुबान में अपनी परेशानी बताते हुए कहते हैं कि जब गोदाम से ही इस तरह का खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाता है तो उनके सामने भी मजबूरी होती है। दुकानदारों का कहना है कि उन्हें जो खाद्यान्न प्राप्त होता है, उसी का वितरण लाभुकों के बीच करना पड़ता है।खराब खाद्यान्न को लेकर उपभोक्ताओं में भी नाराजगी है। उपभोक्ताओं का कहना है कि सरकार गरीब परिवारों को खाद्यान्न उपलब्ध कराने के लिए बड़ी राशि खर्च करती है, ताकि जरूरतमंद परिवारों को राहत मिल सके। ऐसे में यदि गोदाम से ही सड़ा-गला और मिट्टीयुक्त अनाज पीडीएस दुकानों तक पहुंच रहा है, तो इसकी गुणवत्ता जांच की व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।इस संबंध में प्रखंड खाद्य आपूर्ति पदाधिकारी लक्ष्मीकांत रामानी से संपर्क कर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन उठाना जरूरी नहीं समझा। उनका पक्ष सामने नहीं आ सका। हालांकि, खाद्यान्न की गुणवत्ता को लेकर विभागीय स्तर पर जांच होने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर सरकार जब गरीब लोगों की मदद के लिए खाद्यान्न पर इतनी बड़ी राशि खर्च कर रही है, तो लाभुकों तक पहुंचने वाला अनाज गुणवत्तापूर्ण क्यों नहीं है? क्या गोदाम से निकलने से पहले खाद्यान्न की उचित जांच होती है? यदि जांच होती है तो सड़े-गले और मिट्टीयुक्त गेहूं पीडीएस दुकानों तक कैसे पहुंच रहा है?उपभोक्ताओं ने जिला प्रशासन से पीडीएस दुकानों के साथ-साथ संबंधित गोदामों में उपलब्ध खाद्यान्न की नियमित एवं सघन जांच कराने की मांग की है, ताकि गरीबों के हक के खाद्यान्न की गुणवत्ता से किसी भी स्तर पर समझौता न हो और लापरवाही पाए जाने पर जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कार्रवाई की जा सके।


CHANDAN NEWS: पीडीएस के सड़े-गले









