
रिपोर्ट:- उमाकांत पोद्दार।
चांदन/बांका:- एक ओर बिहार सरकार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी प्रदेश में सुशासन और विकास को लेकर लगातार सरकार की उपलब्धियां गिना रहे हैं, वहीं दूसरी ओर चांदन प्रखंड के ग्रामीण इलाकों में आज भी लोग बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशान हैं। चांदन प्रखंड के पहाड़पुर और जमुनी गांव से सामने आई तस्वीर विकास के दावों के बीच जमीनी हकीकत को बयां करती है। यहां ग्रामीण पिछले कई वर्षों से सड़क और नदी पर पुल निर्माण की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी समस्या का स्थायी समाधान होता नजर नहीं आ रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, पहाड़पुर और जमुनी गांव के बीच नदी पर पुल नहीं होने के कारण बरसात के मौसम में आवागमन बेहद मुश्किल हो जाता है। नदी में पानी का जलस्तर बढ़ने के बाद लोगों को उफनते पानी के बीच से होकर आने-जाने की मजबूरी बनी रहती है। इसका सबसे अधिक असर स्कूली बच्चों, शिक्षकों, बुजुर्गों और बीमार लोगों पर पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दिनों में यह रास्ता उनके लिए किसी चुनौती से कम नहीं होता।

मरीजों को खटिया के सहारे नदी पार कराने की मजबूरी
ग्रामीणों ने बताया कि सबसे गंभीर स्थिति तब उत्पन्न होती है, जब किसी व्यक्ति की तबीयत अचानक बिगड़ जाती है। चांदन अस्पताल तक मरीज को पहुंचाने के लिए कई बार खटिया के सहारे नदी पार करानी पड़ती है। नदी में पानी अधिक होने पर एंबुलेंस भी गांव तक पहुंचने में असमर्थ हो जाती है। ऐसे में मरीज और उसके परिजनों को काफी परेशानी उठानी पड़ती है। जमुनी गांव के ग्रामीण विनोद कुमार, प्रदीप मांझी, हरिचरण चौधरी, बाबूलाल चौधरी, मनोज मंडल और देबू चौधरी ने बताया कि करीब एक वर्ष पूर्व नदी पर पुल निर्माण का कार्य शुरू हुआ था। ग्रामीणों के मुताबिक, निर्माण कार्य शुरू होने के बाद उन्हें उम्मीद जगी थी कि जल्द ही वर्षों पुरानी समस्या समाप्त हो जाएगी, लेकिन संवेदक की कथित शिथिलता के कारण निर्माण कार्य बीच में ही बंद हो गया।
डायवर्सन भी दुरुस्त नहीं, बढ़ी परेशानी
ग्रामीणों का कहना है कि निर्माणाधीन पुल का काम बंद होने के साथ-साथ आवागमन के लिए बनाए गए डायवर्सन की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। यदि डायवर्सन को व्यवस्थित और मजबूत तरीके से तैयार किया गया होता तो कम से कम बरसात के दौरान लोगों को वैकल्पिक रास्ता मिल सकता था। लेकिन वर्तमान स्थिति में नदी का पानी बढ़ते ही आवागमन प्रभावित हो जाता है। वहीं पहाड़पुर गांव निवासी अरुण तांती ने भी नदी पर जल्द से जल्द पुल निर्माण पूरा कराने की मांग की है। उनका कहना है कि पुल बनने से गांव के लोगों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिलेगी। खासकर बच्चों को विद्यालय जाने और मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में होने वाली परेशानी काफी हद तक दूर हो सकेगी।

वर्षों से उठ रही मांग, अब स्थायी समाधान की उम्मीद
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क और पुल की समस्या को लेकर लंबे समय से आवाज उठाई जा रही है। जनप्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों तक भी समस्या पहुंचाई गई है, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हो सका है। ग्रामीणों ने संबंधित विभाग और प्रशासन से निर्माणाधीन पुल का काम जल्द शुरू कराकर निर्धारित समय में पूरा कराने तथा तब तक सुरक्षित वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि विकास का वास्तविक लाभ तभी माना जाएगा, जब गांवों तक सड़क, पुल और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाएं सुरक्षित रूप से पहुंचें। फिलहाल पहाड़पुर और जमुनी के ग्रामीणों की निगाहें अधूरे पड़े पुल के निर्माण कार्य के दोबारा शुरू होने और वर्षों पुरानी समस्या के स्थायी समाधान पर टिकी हैं।










