बिहार में शराबबंदी मजाक या सख्ती? 40 लीटर बियर व विदेशी शराब के साथ कारोबारी गिरफ्तार

अलौली पुलिस ने गुप्त सूचना पर मारा छापा, बड़ी मात्रा में शराब बरामद

खगड़िया । बिहार में शराबबंदी कानून लागू होने के बावजूद शराब का अवैध कारोबार धड़ल्ले से जारी है। इसका ताजा उदाहरण अलौली प्रखंड के बहादुरपुर थाना क्षेत्र में देखने को मिला, जहां पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी कर 40 लीटर बियर और विदेशी शराब बरामद की। इस दौरान कारोबारी को भी गिरफ्तार किया गया

गिरफ्तार आरोपी की पहचान पोखरा गांव निवासी रामविनोद यादव के पुत्र प्रणेश कुमार उर्फ लालता के रूप में हुई है।

शराब माफियाओं पर पुलिस की कार्रवाई

थानाध्यक्ष अजय कुमार ने बताया कि गुप्त सूचना पर पोखरा गांव में छापेमारी की गई, जहां से किंगफिशर कंपनी के 500 एमएल के 32 बियर केन (कुल 16 लीटर), हेवर्ड्स कंपनी के 08 बियर केन (कुल 04 लीटर) और 500 एमएल के 40 विदेशी शराब केन (कुल 20 लीटर) बरामद की गई।

आरोपी को गिरफ्तार कर पुलिस द्वारा कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

बिहार में शराबबंदी कानून सिर्फ नाम का?

बिहार सरकार द्वारा शराबबंदी को सख्ती से लागू करने के तमाम दावों के बावजूद शराब का अवैध कारोबार तेजी से फल-फूल रहा है। आए दिन बिहार के अलग-अलग जिलों में शराब की तस्करी और कारोबारियों की गिरफ्तारियां हो रही हैं, जिससे यह सवाल उठना लाजिमी है कि शराबबंदी कानून का कितना पालन हो रहा है?

सरकार के तमाम सख्त निर्देशों के बावजूद शराब माफिया धड़ल्ले से अवैध कारोबार कर रहे हैं, और आम जनता के बीच यह कानून सिर्फ मजाक बनकर रह गया है। प्रशासन की सक्रियता के बावजूद तस्कर नई-नई तरकीबों से शराब की आपूर्ति कर रहे हैं, जिससे शराबबंदी कानून की विफलता पर सवाल उठने लगे हैं।

क्या होगी अगली कार्रवाई?

पुलिस ने गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ शुरू कर दी है और आगे की कार्रवाई में शामिल अन्य आरोपियों की तलाश जारी है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या यह कार्रवाई महज एक औपचारिकता बनकर रह जाएगी या बिहार में अवैध शराब के कारोबार पर कोई ठोस रोक लगाई जा सकेगी?

शराबबंदी कानून पर पुनर्विचार की जरूरत?

बिहार में शराबबंदी लागू होने के बाद से ही लगातार इस कानून के दुरुपयोग और अवैध धंधे के बढ़ने की खबरें आती रही हैं। अब वक्त आ गया है कि सरकार इस कानून की समीक्षा करे और इसे और प्रभावी बनाए, ताकि शराबबंदी सिर्फ कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि वास्तविकता में इसका पालन सुनिश्चित किया जा सके।

रिपोर्ट: प्रवीण कुमार प्रियांशु, दैनिक बिहार पत्रिका 

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