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चैत्र नवरात्र और छठ महापर्व में बनेंगे अद्भुत संयोग! इंद्रयोग, अमृत सिद्धि और सर्वार्थ सिद्धि योग में पूजा-साधना से मिलेगा विशेष पुण्य: आचार्य शुभम सावर्ण 

मां दुर्गा के हाथी पर आगमन से वर्षा और अच्छी फसल का संकेत

पटना। चैत्र मास इस बार बेहद खास होगा। 30 मार्च से चैत्र नवरात्रि और 1 अप्रैल से छठ महापर्व की शुरुआत हो रही है। आचार्य शुभम सावर्ण ने बताया कि इस बार इन दोनों पावन पर्वों के दौरान कई दुर्लभ ज्योतिषीय संयोग बन रहे हैं, जो भक्तों की साधना और आराधना को विशेष फलदायी बनाएंगे।

आचार्य सावर्ण के अनुसार, संवत्सर 2082 “कालयुक्त” है, जिसमें ग्रहों के राजा सूर्य देव ही राजा और मंत्री दोनों हैं। इससे पूरे वर्ष में गर्मी और उग्रता बढ़ेगी, राजसत्ता का प्रभाव भी मजबूत होगा। वहीं, मां दुर्गा इस बार हाथी पर आ रही हैं, जो शुभ संकेत है। इससे वर्षा अच्छी होगी और कृषि क्षेत्र में समृद्धि आएगी।

चैत्र नवरात्र के दौरान इंद्रयोग, रेवती नक्षत्र, बुध-आदित्य योग, सूर्यास्त के बाद सर्वार्थ सिद्धि योग तथा अमृत सिद्धि योग जैसे अद्भुत संयोग बनेंगे। ये विशेष योग व्रत, पूजा-पाठ और तपस्या के लिए बेहद फलदायी सिद्ध होंगे।

चैत्र नवरात्र के महत्वपूर्ण मुहूर्त व आयोजन:

  • कलश स्थापना (30 मार्च): प्रातः 6:30 से 10:22 तक। अभिजीत मुहूर्त 11:53 से 12:48 तक। (सूर्यास्त से पूर्व भी संभव)
  • 2 अप्रैल (बुधवार): कुष्मांडा और स्कंदमाता की पूजा के साथ श्री पंचमी मनाई जाएगी।
  • 5 अप्रैल (शनिवार): महा अष्टमी, निशा पूजा व देवी जागरण।
  • 6 अप्रैल (रविवार): रामनवमी का पर्व। रवि पुष्य योग सुबह 9:52 से शुरू होगा। इसी दिन सिद्धिदात्री पूजा, कुमारी पूजन, हवन, कुष्मांडा बली, सीताराम सपरिवार पूजन, हनुमत ध्वजदान, राम रक्षा स्तोत्र, विष्णु सहस्रनाम, रामाष्टक, सुंदरकांड पाठ और भगवान श्रीराम की भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी।
  • 7 अप्रैल (सोमवार): नवरात्र व्रत का पारण।
  • 8 अप्रैल (मंगलवार): कामदा एकादशी व्रत।
  • 10 अप्रैल (गुरुवार): प्रदोष व्रत।
  • 12 अप्रैल (शनिवार): चैत्र पूर्णिमा।

छठ महापर्व की विशेष तिथियां:

  • 1 अप्रैल (मंगलवार): नहाय-खाय
  • 2 अप्रैल (बुधवार): खरना
  • 3 अप्रैल (गुरुवार): संध्याकालीन सूर्य अर्घ्य
  • 4 अप्रैल (शुक्रवार): प्रातःकालीन सूर्य अर्घ्य के साथ छठ व्रत सम्पन्न होगा।
वहीं आचार्य शुभम सावर्ण ने ‘दैनिक बिहार पत्रिका’ के माध्यम से श्रद्धालुओं को संदेश देते हुए कहा कि “यह समय केवल पूजा-पाठ का नहीं बल्कि आत्मशुद्धि, आध्यात्मिक जागरण और जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का अवसर है। जो भक्त इस पावन अवधि में संयम, श्रद्धा और नियम के साथ व्रत, पूजन और साधना करेंगे, वे जीवन में सुख, समृद्धि और शांति प्राप्त करेंगे। मां दुर्गा और सूर्य देव की कृपा से यह शुभ काल सभी के जीवन में मंगलकारी सिद्ध होगा।”

ब्यूरो रिपोर्ट, दैनिक बिहार पत्रिका 

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Author: दैनिक बिहार पत्रिका

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