गोगरी में शिक्षा माफियाओं का साम्राज्य: कुकुरमुत्ते की तरह खुल रहे प्राइवेट स्कूल, प्रशासन मौन!

शिक्षा व्यवस्था की खुली लूट, अभिभावकों का खुलेआम शोषण – ज़िम्मेदार अधिकारी कहां हैं?

खगड़िया/गोगरी। गोगरी अनुमंडल क्षेत्र में शिक्षा माफियाओं का बोलबाला है। कुकुरमुत्ते की तरह बिना मान्यता और सुविधाओं वाले प्राइवेट स्कूलों की बाढ़ सी आ गई है। प्रशासनिक निगरानी शून्य है और ज़िला शिक्षा विभाग मौन! शिक्षा के नाम पर शुद्ध व्यवसाय चल रहा है – जहाँ न मानक हैं, न नैतिकता और न ही बच्चों के भविष्य की कोई चिंता।

प्रशासन की लचर व्यवस्था और शिक्षा माफियाओं की साठगांठ से जिले में हर गली-मुहल्ले में स्कूल खुल रहे हैं। न खेलने का मैदान, न पुस्तकालय, न प्रयोगशाला और न ही योग्य शिक्षक। बावजूद इसके हर साल भारी-भरकम नामांकन शुल्क, ड्रेस, स्टेशनरी, ट्रांसपोर्ट फीस और मनमाने “विकास शुल्क” की वसूली की जा रही है।

अभिभावक फंस रहे हैं जाल में, प्रशासन बना मूकदर्शक

भोले-भाले अभिभावकों को सुनहरे भविष्य का सपना दिखाकर शिक्षा माफिया अपने जाल में फंसा रहे हैं। दलालों के माध्यम से नामांकन करवाकर, उनसे मनमानी वसूली कर रहे हैं। कई स्कूल बिना किसी वैध मान्यता के चल रहे हैं और संबंधित अधिकारी जांच के बजाय चुप्पी साधे बैठे हैं।

पर्दे के पीछे की राजनीति और दलाल पत्रकारों का खेल

कुछ तथाकथित पत्रकारों की मिलीभगत से इन स्कूलों की खामियों पर पर्दा डाला जा रहा है। समय-समय पर छोटे-मोटे कार्यक्रमों में सम्मानित कर पत्रकारों को ‘प्रसन्न’ किया जाता है, जिससे स्कूलों की असलियत सामने न आ सके। यह सिलसिला अब गोगरी जैसे छोटे कस्बों तक आ गया है, जहाँ पत्रकारिता को मोहरा बनाकर शिक्षा माफियाओं के कारनामे छिपाए जा रहे हैं।

ट्रांसपोर्ट से लेकर किताबों तक की लूट – बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़

स्कूलों की बसों में क्षमता से दोगुने बच्चे ठूंसे जा रहे हैं। अधिकतर बसें स्कूल परिसर तक नहीं जातीं, बच्चों को सड़क किनारे उतार दिया जाता है – जो सुरक्षा की दृष्टि से खतरनाक है। किताबों और पोशाक के नाम पर स्कूल प्रबंधन प्रकाशकों से कमीशन खाकर विशेष किताबें थोप रहे हैं – महंगी और गैरज़रूरी।

शिक्षकों का भी हो रहा शोषण – कम वेतन, ज़्यादा काम

इन स्कूलों में पढ़ा रहे शिक्षकों को सरकारी मानकों के अनुसार न तो वेतन मिलता है और न ही अन्य लाभ। जबकि अभिभावकों से मोटी फीस वसूली जाती है। यानी मुनाफा स्कूल प्रबंधन का, शोषण शिक्षकों और अभिभावकों का।


अब सवाल जिला शिक्षा पदाधिकारी और जिला पदाधिकारी से – जवाब तो देना ही होगा!

  • क्या गोगरी अनुमंडल में चल रहे सभी निजी स्कूल सरकार द्वारा निर्धारित मापदंडों पर खरे उतरते हैं?
  • कितने स्कूलों के पास खेल मैदान, पुस्तकालय और प्रयोगशाला की सुविधा है?
  • कितने स्कूलों ने वैध मान्यता प्राप्त की है?
  • क्या शिक्षा पदाधिकारी ने कभी गोगरी क्षेत्र में औचक निरीक्षण कर किसी स्कूल पर कार्रवाई की?
  • कब तक शिक्षा के नाम पर व्यापार होता रहेगा और प्रशासन मूकदर्शक बना रहेगा?

जनता पूछ रही है – क्या गोगरी शिक्षा माफियाओं के हवाले कर दिया गया है?

इस पूरे मामले में ज़िला पदाधिकारी और शिक्षा विभाग को तत्काल संज्ञान लेना चाहिए। यदि जल्द कठोर कदम नहीं उठाए गए, तो जिले की आनेवाली पीढ़ी मुनाफाखोरों के जाल में उलझ कर रह जाएगी। यह वक्त है, जब नकली शैक्षणिक प्रतिष्ठानों के चेहरों से नकाब हटाया जाए।

रिपोर्ट: दैनिक बिहार पत्रिका

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Author: दैनिक बिहार पत्रिका

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