अक्षय तृतीया पर दुर्लभ गौरी विनायक और गजकेसरी योग का अद्भुत संयोग, मिलेगा कोटि गुना पुण्य : आचार्य शुभम सावर्ण

गोगरी/खगड़िया। वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि, जिसे हम अक्षय तृतीया के रूप में जानते हैं, इस वर्ष 30 अप्रैल, बुधवार को अत्यंत शुभ संयोगों के बीच मनाई जाएगी।
आचार्य शुभम सावर्ण के अनुसार, अक्षय तृतीया को शास्त्रों में स्वयं सिद्ध मुहूर्त कहा गया है, जिसका अर्थ है कि इस दिन शुभ कार्यों के लिए पंचांग देखने की आवश्यकता नहीं होती। हर प्रकार के मांगलिक कार्य स्वयमेव शुभफलदायक होते हैं।

अक्षय तृतीया का उल्लेख विष्णुधर्मसूत्र, नारद पुराण और भविष्य पुराण जैसे महान ग्रंथों में भी मिलता है। भविष्य पुराण के अनुसार, इसी तिथि को सतयुग और त्रेतायुग का आरंभ हुआ था। साथ ही इस दिन भगवान परशुराम का जन्म भी हुआ था, इसलिए इसे परशुराम जयंती के रूप में भी पूजा जाता है। उत्तर भारत में इसे लोकप्रिय रूप से आखा तीज के नाम से भी जाना जाता है।

अक्षय तृतीया का विशेष महत्व
यह तिथि विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन संस्कार, देव प्रतिष्ठा, भवन निर्माण, संपत्ति खरीदारी, व्यापार आरंभ, वृक्षारोपण एवं आवेदन लेखन सहित समस्त शुभ कार्यों के लिए श्रेष्ठ मानी गई है। इस दिन किए गए पुण्यकर्मों का फल अक्षय होता है, अर्थात जो कभी नष्ट नहीं होता।

आचार्य शुभम सावर्ण बताते हैं कि इस वर्ष अक्षय तृतीया अत्यंत विशिष्ट बन रही है क्योंकि इस दिन गजकेसरी योग, गौरी विनायक योग, सर्वार्थ सिद्धि योग, रोहिणी नक्षत्र, शोभन योग, चतुर्थी युक्त तृतीया और बुधवार का अद्भुत संयोग एक साथ बन रहा है।

इस दिन सूर्य अपने उच्च स्थान मेष राशि में और चंद्रमा वृषभ राशि में रहेंगे। गुरु और चंद्रमा की युति से बनने वाला गजकेसरी योग व्यक्ति के जीवन में अपार समृद्धि और शुभता लाने वाला माना गया है। इस प्रकार के दुर्लभ योगों में किए गए कार्यों का फल कोटि गुना बढ़कर प्राप्त होता है।

अक्षय तृतीया 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त
तृतीया तिथि का आरंभ 29 अप्रैल को रात 8:42 बजे से होगा, जो 30 अप्रैल को सायं 6:05 बजे तक रहेगा। इस दिन पूजा का उत्तम समय प्रातः 6:07 बजे से दोपहर 12:37 बजे तक निर्धारित है।

भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष पूजा इस दिन अत्यंत फलदायक मानी गई है। सफेद एवं पीले फूलों से पूजन कर, विष्णु सहस्रनाम, श्री सूक्त एवं रामरक्षा स्तोत्र का पाठ करने से जीवन में अक्षय सुख-संपदा की प्राप्ति होती है।

खरीदारी और निवेश का महत्व
अक्षय तृतीया पर मूल्यवान वस्तुओं की खरीदारी का विशेष महत्व है। सोना, चांदी, रत्न, भूमि, वाहन आदि की खरीद इस दिन शुभ मानी जाती है।
खरीदारी के लिए श्रेष्ठ समय प्रातः 10:36 बजे से दोपहर 12:46 बजे तक तथा संध्या 4:35 बजे से 6:14 बजे तक रहेगा।

दान, पुण्य और धार्मिक अनुष्ठान
इस दिन पवित्र नदियों में स्नान, तर्पण और दान करना विशेष पुण्यदायी माना गया है। जल से भरा हुआ कलश, सत्तू, शक्कर, घी, सुवर्ण, रत्न, वस्त्र, पंखा, छाता, जूता, भोजन सामग्री, फल एवं मिष्ठान्न का दान करने से व्यक्ति को अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।

व्यापार में उन्नति और सुख-समृद्धि हेतु एकाक्षी नारियल को लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी या पूजन स्थल में स्थापित करना अत्यंत शुभ फल देने वाला उपाय माना गया है।

अक्षय तृतीया: शुभ संकल्प का दिन
अक्षय तृतीया का दिन केवल दान और पूजन तक सीमित नहीं है। यह आत्मशुद्धि, सकारात्मक संकल्प और नए आरंभ के लिए भी श्रेष्ठ दिन है।
आचार्य शुभम सावर्ण के अनुसार, इस विशेष तिथि पर किए गए पुण्यकर्मों और शुभ कार्यों का प्रभाव जीवनभर बना रहता है और व्यक्ति को लोक और परलोक दोनों में अक्षय सुख की प्राप्ति होती है।

ब्यूरो रिपोर्ट, दैनिक बिहार पत्रिका 

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