शहीद सुखदेव के बलिदान को देश कभी नहीं भूलेगा : शिक्षक सिद्धार्थ कुमार

देशभक्ति, साहस और कुर्बानी की मिसाल थे सुखदेव थापर

खगड़िया, परबत्ता। परबत्ता प्रखंड के शिक्षक सिद्धार्थ कुमार ने स्वतंत्रता संग्राम के महानायक शहीद सुखदेव थापर को याद करते हुए कहा कि उनके साहस और बलिदान को देश कभी नहीं भुला सकता। सुखदेव का जन्म 15 मई 1907 को हुआ था। उनके पिता का नाम रामलाल और माता का नाम रल्ली देवी था। बचपन में ही पिता का साया उठ गया था, जिसके बाद उनका लालन-पालन उनके चाचा ने किया।

सुखदेव, भगत सिंह के परम मित्र और हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन के सक्रिय सदस्य थे। वह कुशल रणनीतिकार थे और उन्होंने भगत सिंह के साथ मिलकर अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ कई योजनाएं बनाई। लाला लाजपत राय की मृत्यु के विरोध में उन्होंने ब्रिटिश अधिकारियों के खिलाफ प्रदर्शन किया और स्कूल में पढ़ाई के दौरान अंग्रेज अधिकारियों को सलाम करने से इनकार कर दिया।

शिक्षक सिद्धार्थ कुमार ने बताया कि सुखदेव ही वह शख्स थे जिन्होंने भगत सिंह को असेंबली हॉल में बम फेंकने के लिए प्रेरित किया। उनकी देशभक्ति, साहस और बलिदान की भावना ने उन्हें अमर शहीदों की सूची में सर्वोच्च स्थान दिलाया।

23 मार्च 1931 को सुखदेव को भगत सिंह और राजगुरु के साथ फांसी दी गई थी। उनका यह बलिदान आज भी देशभक्तों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है। शिक्षक ने कहा कि ऐसे वीर सपूतों के बलिदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाना हमारी जिम्मेदारी है।

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