
‘मेरा रेशम मेरा अभिमान 2.0’ के तहत वैज्ञानिक-किसान संवाद; भोर्सार और सतभैया में 60 से अधिक किसान-लाभार्थी हुए शामिल, कीट-रोग से बचाव और आधुनिक तकनीकों की मिली जानकारी
बांका:- तसर रेशम उत्पादन से जुड़े किसानों को अब केवल कोकून उत्पादन तक सीमित नहीं रखते हुए उन्हें रीलिंग और तसर मूल्य शृंखला की अन्य गतिविधियों से जोड़कर अतिरिक्त आय एवं स्थानीय रोजगार के अवसर विकसित करने की पहल की जा रही है। इसी उद्देश्य से ‘मेरा रेशम मेरा अभिमान 2.0’ के तहत बांका जिले में वैज्ञानिक-किसान संवाद एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। केंद्रीय रेशम बोर्ड, सीएसबी-सीटीआरटीआई, रांची तथा तसर अग्र परियोजना केंद्र इनारावरण की ओर से 11 सितंबर को कटोरिया प्रखंड के भोर्सार गांव में वैज्ञानिक-किसान संवाद और चानन प्रखंड के सतभैया गांव में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित हुआ। दोनों कार्यक्रमों में क्षेत्र के 60 से अधिक किसानों एवं लाभार्थियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिला उद्योग केंद्र, बांका के महाप्रबंधक के.के. भारती ने किसानों से तसर रेशम उत्पादन एवं इससे जुड़ी गतिविधियों को ईमानदारी और समर्पण के साथ अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक तकनीकों के इस्तेमाल से उत्पादन और गुणवत्ता में सुधार कर किसान अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं। उन्होंने पीपीसी इनारावरण को लाभार्थी किसानों का व्हाट्सऐप समूह बनाने का सुझाव भी दिया। इसके माध्यम से तसर क्षेत्र में विकसित नई तकनीक, प्रशिक्षण सामग्री और उपयोगी वीडियो किसानों तक नियमित रूप से पहुंचाए जा सकेंगे।
कीट और रोग से होने वाले नुकसान पर वैज्ञानिकों का फोकस
सीएसबी-सीटीआरटीआई, रांची के वैज्ञानिक-बी एवं बांका जिले के MRMA 2.0 के नोडल अधिकारी आशु कुमार ने किसानों के साथ सीधे संवाद किया। इस दौरान रेशमकीट पालन एवं बीजागार में आने वाली समस्याओं, खासकर कीट एवं रोग प्रकोप के कारण रेशमकीटों की मृत्यु और उससे किसानों को होने वाले नुकसान पर विस्तार से चर्चा की गई। उन्होंने किसानों को वैज्ञानिक रूप से विकसित तकनीक और उचित प्रबंधन उपाय अपनाने की सलाह दी, ताकि रेशमकीट पालन के दौरान मृत्यु दर कम की जा सके और उत्पादकता बढ़ाई जा सके।
गांवों में रीलिंग क्लस्टर विकसित करने पर जोर
कार्यक्रम में किसानों को कोकून उत्पादन के बाद तसर की मूल्य शृंखला में आगे बढ़ने के लिए भी प्रेरित किया गया। वैज्ञानिकों ने कोकून रीलिंग अपनाने और भविष्य में किसानों की सहभागिता से गांव स्तर पर रीलिंग क्लस्टर विकसित करने की संभावनाओं पर जोर दिया। ऐसा होने से तैयार कोकून से आगे की प्रक्रिया स्थानीय स्तर पर होने के साथ रोजगार और अतिरिक्त आय के नए अवसर विकसित हो सकेंगे। संवाद के दौरान किसानों ने तसर उत्पादन से जुड़े अपने अनुभव और जमीनी समस्याएं भी वैज्ञानिकों एवं अधिकारियों के सामने रखीं और उनके समाधान की जानकारी प्राप्त की। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों को खेत और किसानों तक पहुंचाकर तसर उत्पादन की चुनौतियों को कम करना, उत्पादकता बढ़ाना और रेशम आधारित आजीविका को अधिक मजबूत बनाना रहा।









