
बजाज जनरल इंश्योरेंस के हेड-हेल्थ एडमिनिस्ट्रेशन टीम विकास गुप्ता ने बताया कि बेस कवर, बजट और भविष्य की मेडिकल जरूरतों के आधार पर किया जाना चाहिए सही चुनाव
दैनिक बिहार पत्रिका। भारत में स्वास्थ्य सेवाओं की लागत लगातार बढ़ रही है। ऐसे में अचानक आने वाले बड़े मेडिकल खर्चों से वित्तीय सुरक्षा के लिए पर्याप्त हेल्थ इंश्योरेंस कवर जरूरी हो गया है। हालांकि, कई लोगों के सामने यह सवाल रहता है कि बेस हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी में अधिक सम इंश्योर्ड लिया जाए या कम बेस कवर के साथ सुपर टॉप-अप प्लान का विकल्प चुना जाए। बजाज जनरल इंश्योरेंस के हेड-हेल्थ एडमिनिस्ट्रेशन टीम विकास गुप्ता के अनुसार, इसका फैसला व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य, परिवार की जरूरतों, बजट और पहले से मौजूद हेल्थ कवर को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।
उच्च सम इंश्योर्ड का अर्थ है मौजूदा बेस हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी की कवरेज सीमा को बढ़ाना। उदाहरण के लिए, यदि किसी व्यक्ति के पास 10 लाख रुपये का बेस कवर है और वह इसे बढ़ाकर 20 लाख रुपये करता है, तो बढ़ी हुई राशि उसी बेस पॉलिसी का हिस्सा होती है। इसका एक प्रमुख लाभ यह है कि पॉलिसी की कवरेज का इस्तेमाल पहले ही क्लेम से किया जा सकता है और इसके लिए अलग से सुपर टॉप-अप डिडक्टिबल की शर्त नहीं होती। हालांकि, अधिक सम इंश्योर्ड के साथ पॉलिसी का प्रीमियम भी बढ़ता है।
वहीं, सुपर टॉप-अप प्लान बेस हेल्थ कवर के ऊपर अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करता है। इसमें एक निर्धारित डिडक्टिबल होता है। उदाहरण के तौर पर 10 लाख रुपये के बेस कवर के साथ 10 लाख रुपये के डिडक्टिबल वाला 40 लाख रुपये का सुपर टॉप-अप लिया जा सकता है। पॉलिसी वर्ष के दौरान पात्र मेडिकल खर्च निर्धारित डिडक्टिबल से अधिक होने पर सुपर टॉप-अप से अतिरिक्त कवरेज मिल सकती है। इसका प्रमुख फायदा यह है कि अपेक्षाकृत कम प्रीमियम में बड़ा अतिरिक्त कवर लिया जा सकता है। हालांकि, डिडक्टिबल की शर्तों और क्लेम प्रक्रिया को पॉलिसी लेते समय अच्छी तरह समझना जरूरी है। यदि बेस और सुपर टॉप-अप अलग-अलग बीमा कंपनियों से लिए गए हों, तो क्लेम के दौरान दोनों कंपनियों के बीच समन्वय की आवश्यकता पड़ सकती है।
उच्च सम इंश्योर्ड और सुपर टॉप-अप के बीच चुनाव करते समय उम्र, स्वास्थ्य, रहने का शहर, परिवार की जिम्मेदारियां, लाइफस्टाइल, वित्तीय लक्ष्य और पहले से उपलब्ध हेल्थ कवर जैसे पहलुओं को ध्यान में रखना चाहिए। स्रोत के अनुसार, कई लोगों के लिए 10 से 25 लाख रुपये तक का बेस हेल्थ कवर और जरूरत के अनुसार 50 लाख से 1 करोड़ रुपये तक का सुपर टॉप-अप विकल्प उपयोगी हो सकता है। इसमें डिडक्टिबल की राशि व्यक्ति की मौजूदा कवरेज और जरूरत के अनुसार तय की जा सकती है।
महानगरों में मेडिकल खर्च अपेक्षाकृत अधिक होने के कारण करीब 20 से 25 लाख रुपये के बेस कवर के साथ 50 लाख रुपये का सुपर टॉप-अप विकल्प रखने की संभावना पर भी विचार किया जा सकता है। वहीं, कम उम्र और अच्छी स्वास्थ्य स्थिति वाले ऐसे लोगों के लिए, जिनके पास पहले से पर्याप्त बेस हेल्थ कवर है, सुपर टॉप-अप कम अतिरिक्त प्रीमियम में बड़ा सुरक्षा कवच बढ़ाने का विकल्प हो सकता है।
हेल्थ इंश्योरेंस चुनते समय केवल आज की जरूरत नहीं, बल्कि भविष्य में होने वाले संभावित मेडिकल खर्च और उनके परिवार की दीर्घकालिक वित्तीय योजना पर पड़ने वाले प्रभाव को भी ध्यान में रखना चाहिए। पॉलिसी की कवरेज, डिडक्टिबल, क्लेम की शर्तें, नेटवर्क अस्पताल और अन्य नियमों को समझकर ही निर्णय लेना महत्वपूर्ण है।
विकास गुप्ता के अनुसार, सही बेस पॉलिसी के साथ सुपर टॉप-अप का संयोजन कई पॉलिसीधारकों के लिए बड़े मेडिकल खर्चों के खिलाफ अतिरिक्त सुरक्षा उपलब्ध कराने का एक विकल्प हो सकता है। हालांकि, अंतिम कवरेज का चुनाव व्यक्ति की अपनी स्वास्थ्य जरूरतों, वित्तीय स्थिति और पॉलिसी की शर्तों को समझने के बाद ही किया जाना चाहिए। हेल्थ इंश्योरेंस को भविष्य के मेडिकल खर्चों के लिए वित्तीय सुरक्षा के एक साधन के रूप में देखते हुए पर्याप्त और उपयुक्त कवरेज की योजना बनाना जरूरी है।











