
डीएम ने किशोरों से सीधे किया संवाद, सप्ताह में एक दिन मनोवैज्ञानिक की सेवा उपलब्ध कराने का निर्देश
बांका:- पर्यवेक्षण गृह में रह रहे किशोरों की सुविधाओं और उनके पुनर्वास की व्यवस्था को लेकर जिला पदाधिकारी अंशुल अग्रवाल ने बुधवार को निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने किशोरों से सीधे संवाद कर उनकी पढ़ाई, खान-पान, उपलब्ध सुविधाओं और कर्मचारियों के व्यवहार की जानकारी ली। निरीक्षण का मुख्य फोकस बच्चों को सुरक्षित, स्वस्थ और सकारात्मक वातावरण उपलब्ध कराने पर रहा।
बच्चों से पूछी पढ़ाई और समस्याएं
डीएम ने पर्यवेक्षण गृह में रह रहे किशोरों से उनकी उम्र, पढ़ाई और रोजमर्रा की गतिविधियों के बारे में जानकारी ली। उन्होंने यह भी पूछा कि उन्हें यहां किस तरह की सुविधाएं मिल रही हैं और उनके साथ कर्मचारियों का व्यवहार कैसा रहता है। किसी प्रकार की समस्या या आवश्यकता होने पर उसकी जानकारी देने के लिए भी बच्चों से बातचीत की गई। निरीक्षण के दौरान सभी कर्मी उपस्थित पाए गए। डीएम ने कर्मचारियों को किशोरों के साथ सौम्य, संवेदनशील और सकारात्मक व्यवहार करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास के लिए स्वस्थ वातावरण जरूरी है। इसके लिए खेलकूद और मनोरंजन से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया।

हर सप्ताह मनोवैज्ञानिक से कराया जाएगा संवाद
किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य और व्यवहारिक सुधार को लेकर डीएम ने सिविल सर्जन को महत्वपूर्ण निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि सप्ताह में एक दिन मनोवैज्ञानिक को पर्यवेक्षण गृह भेजा जाए, ताकि बच्चों से संवाद कर उनकी मानसिक स्थिति को समझा जा सके और आवश्यकता के अनुसार परामर्श एवं सुधारात्मक कार्य किए जा सकें। इसके साथ ही बच्चों के विकास से जुड़ी गतिविधियों और उनकी प्रगति पर नियमित नजर रखने तथा उनकी जरूरतों के अनुरूप सहयोग उपलब्ध कराने को कहा गया।
अनुचित व्यवहार की शिकायत पर स्पष्टीकरण
निरीक्षण के दौरान एक आवासित किशोर ने परिवीक्षा पदाधिकारी कल्याणी कुमारी पर कथित रूप से अनुचित व्यवहार किए जाने की शिकायत की। जिला पदाधिकारी ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए संबंधित परिचारी से स्पष्टीकरण प्राप्त करने का निर्देश दिया। मामले में शिकायत के आधार पर आगे की कार्रवाई की बात कही गई है।
रसोई और चिकित्सा कक्ष की भी जांच
डीएम ने पर्यवेक्षण गृह के चिकित्सा कक्ष, खान-पान कक्ष और रसोईघर का भी निरीक्षण किया। इस दौरान बच्चों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की स्थिति का जायजा लिया गया। संबंधित कर्मियों को किशोरों से नियमित संवाद करते हुए उनकी समस्याओं और आवश्यकताओं की जानकारी लेने तथा समय पर समाधान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। डीएम ने यह भी स्पष्ट किया कि पर्यवेक्षण गृह के निरीक्षण के दौरान अधिकारियों द्वारा दिए गए सुझावों और निर्देशों का पालन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने बच्चों के हित, सुरक्षा और सर्वांगीण विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर जोर दिया।











