
आयुर्वेद दिवस पर छात्राओं ने किया पौधरोपण, नीम-तुलसी से लेकर आंवला और एलोवेरा तक की उपयोगिता बताई गई
बौंसी/बांका:- आयुर्वेद को किताबों से निकालकर विद्यार्थियों के दैनिक जीवन और प्रकृति से जोड़ने की पहल पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय शक्तिनगर में देखने को मिली। बुधवार को आयुर्वेद दिवस के अवसर पर विद्यालय परिसर में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान विद्यार्थियों को औषधीय पौधों की पहचान, उनके महत्व और संरक्षण की जानकारी दी गई।
पौधों के साथ स्वास्थ्य की समझ
कार्यक्रम में नीम, तुलसी, हरसिंगार, एलोवेरा, सदाबहार और आंवला सहित विभिन्न औषधीय पौधों के बारे में विद्यार्थियों को बताया गया। प्रातःकालीन सभा के दौरान कक्षा नवम की छात्राओं ने स्टाफ नर्स श्रीमती रूपा महतो और सीसीए प्रभारी श्रीमती अनिता कुमारी के मार्गदर्शन में विद्यालय परिसर में औषधीय पौधों का रोपण भी किया। पौधरोपण के माध्यम से विद्यार्थियों को यह समझाने का प्रयास किया गया कि विद्यालय परिसर केवल पढ़ाई का स्थान नहीं, बल्कि प्रकृति और स्वास्थ्य से जुड़ी व्यवहारिक जानकारी हासिल करने का माध्यम भी बन सकता है।

संरक्षण पर दिया जोर
सीसीए प्रभारी अनिता कुमारी ने विद्यार्थियों को औषधीय पौधों की उपयोगिता के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने पौधों के संरक्षण और संवर्धन के लिए विद्यार्थियों को प्रेरित किया तथा प्राकृतिक संसाधनों के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करने पर जोर दिया। विद्यालय के प्रभारी प्राचार्य संजय कुमार पाण्डेय ने आयुर्वेद के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह भारतीय चिकित्सा एवं जीवन-पद्धति की महत्वपूर्ण परंपरा है। उन्होंने विद्यार्थियों से प्रकृति के साथ जुड़ने, औषधीय पौधों की पहचान करने और उनके संरक्षण के प्रति जागरूक रहने का आह्वान किया।

23 सितंबर को तय हुई आयुर्वेद दिवस की तिथि
प्रभारी प्राचार्य ने बताया कि 23 सितंबर को आयुर्वेद दिवस मनाया जा रहा है। आयुष मंत्रालय ने वर्ष 2025 में निर्णय लिया था कि अब आयुर्वेद दिवस प्रत्येक वर्ष 23 सितंबर को मनाया जाएगा। इससे पहले यह दिवस धनतेरस के अवसर पर मनाया जाता था, जिसकी तिथि हर वर्ष बदलती थी। मंत्रालय के अनुसार 23 सितंबर की तिथि को प्रकृति में संतुलन की अवधारणा से भी जोड़ा गया है। विद्यालय में आयोजित कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में आयुर्वेद, प्राकृतिक स्वास्थ्य परंपराओं और औषधीय पौधों के प्रति जागरूकता विकसित करना रहा। साथ ही पौधरोपण के जरिए विद्यालय परिसर को अधिक हरित बनाने और विद्यार्थियों को प्रकृति संरक्षण से जोड़ने का संदेश दिया गया।


BOUNSI NEWS: औषधीय पौधों की









