
गणित-विज्ञान की गतिविधियों को बच्चों की समझ, सहभागिता और समस्या-समाधान क्षमता से जोड़ने की पहल; 11 प्रखंडों की तकनीकी टीम को मिला गुणवत्ता सुधार का दायित्व
बांका:- प्रोजेक्ट-बेस्ड लर्निंग यानी PBL के क्रियान्वयन में बिहार के 38 जिलों में जनवरी 2026 से लगातार प्रथम स्थान पर चल रहा बांका अब अपनी इस उपलब्धि को कक्षा-कक्ष की वास्तविक सीख में बदलने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसी उद्देश्य से गुरुवार को बिहार शिक्षा परियोजना परिषद के सभागार में जिला एवं प्रखंड स्तरीय तकनीकी टीम के सदस्यों के लिए समीक्षा-सह-उन्मुखीकरण कार्यशाला आयोजित की गई।
रैंकिंग नहीं, बच्चों की सीख बनेगी असली कसौटी
कार्यशाला में जिले के सभी 11 प्रखंडों की तकनीकी टीमों ने भाग लिया। अध्यक्षता जिला शिक्षा पदाधिकारी देव नारायण पंडित ने की। जिला कार्यक्रम पदाधिकारी समग्र शिक्षा फारूक रहमान, जिला गुणवत्ता शिक्षा समन्वयक मनोहर सिंह के अलावा शिक्षा विभाग, इन्वॉल्व लर्निंग सॉल्यूशंस फाउंडेशन और मंत्रा फॉर चेंज के प्रतिनिधि मौजूद रहे। बैठक में स्पष्ट किया गया कि PBL का उद्देश्य केवल मॉडल, चार्ट या प्रोजेक्ट तैयार करवाना नहीं है। परियोजना के दौरान बच्चा कितना सोचता है, सवाल करता है, जानकारी जुटाता है, प्रयोग करता है और अपनी समझ को व्यवहार में प्रस्तुत करता है—अब गुणवत्ता का आकलन इन पहलुओं से भी किया जाएगा।
गणित-विज्ञान में गतिविधियों पर विशेष जोर
प्रखंडवार समीक्षा के दौरान गणित और विज्ञान में गतिविधि आधारित परियोजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने पर चर्चा हुई। तकनीकी टीमों को विद्यालयों में आवश्यक सहयोग देने तथा यह देखने की जिम्मेदारी दी गई कि परियोजनाएं केवल कागजी गतिविधि बनकर न रह जाएं। शिक्षकों के मार्गदर्शन के साथ बच्चों को स्वयं समस्या पहचानने, प्रश्न पूछने, समाधान खोजने और अपनी सीख साझा करने के अवसर देने पर जोर दिया गया।
TSF से परखी जाएगी PBL की गुणवत्ता
कार्यशाला में टीचर सक्सेस फ्रेमवर्क के विभिन्न आयामों को PBL से जोड़कर समझाया गया। पाठ योजना, समझ की जांच, विद्यार्थी सहभागिता, सीखने के लिए पर्याप्त समय, कक्षा प्रबंधन, आकलन एवं प्रतिपुष्टि तथा उपलब्ध संसाधनों के प्रभावी उपयोग जैसे बिंदुओं पर तकनीकी टीम को मार्गदर्शन दिया गया। विद्यालय भ्रमण के दौरान अब केवल यह देखना पर्याप्त नहीं होगा कि प्रोजेक्ट तैयार हुआ या नहीं। टीमों को यह भी समझना होगा कि उस प्रोजेक्ट से बच्चों ने वास्तव में क्या सीखा और सीखने का प्रमाण कक्षा में किस रूप में दिखाई दे रहा है।
प्रखंड स्तर पर बनेगी कार्ययोजना
गणित एवं विज्ञान में सीखने के परिणाम बेहतर करने के लिए प्रखंड स्तर पर कार्ययोजना तैयार करने पर भी चर्चा हुई। तकनीकी टीमों को विद्यालयों के साथ लगातार समन्वय कर गतिविधि आधारित परियोजनाओं को बढ़ावा देने और बच्चों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई। कार्यशाला में अभिभावकों और समुदाय की भागीदारी को भी महत्वपूर्ण माना गया। बच्चों द्वारा तैयार प्रोजेक्ट और मॉडल को अभिभावकों तथा समुदाय के सामने साझा करने पर जोर दिया गया, ताकि विद्यालय में होने वाली सीखने की प्रक्रिया घर और समाज तक भी पहुंचे।
अब उपलब्धि का असर दिखाने की चुनौती
बांका का लगातार राज्य में प्रथम स्थान पर रहना शिक्षा विभाग के लिए उपलब्धि जरूर है, लेकिन कार्यशाला का संदेश इससे आगे का है। अब प्रयास यह है कि PBL की सफलता केवल रैंकिंग या प्रोजेक्ट प्रदर्शन में नहीं, बल्कि बच्चों की समझ, जिज्ञासा, सहभागिता और समस्या-समाधान क्षमता में दिखाई दे। कार्यशाला के अंत में तकनीकी टीमों ने अपने-अपने प्रखंडों में PBL को अधिक प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए आवश्यक कार्ययोजना पर काम करने की प्रतिबद्धता जताई।










