
‘नेकी की दीवार’ से पुनः उपयोग को बढ़ावा, कम्पोस्टिंग और बोतल क्रशिंग मशीनों के जरिए सिंगल-यूज प्लास्टिक पर रोक की पहल
मालदा/भागलपुर:- रेलवे परिसरों में स्वच्छता को केवल सफाईकर्मियों की जिम्मेदारी तक सीमित रखने के बजाय यात्रियों, रेलकर्मियों और स्थानीय समुदाय को भी इससे जोड़ने की पहल तेज हुई है। ‘स्वच्छता ही सेवा–2026’ के तहत पूर्व रेलवे के हावड़ा, सियालदह, आसनसोल और मालदा मंडल सहित प्रमुख कार्यशालाओं में स्वच्छता एवं कचरा प्रबंधन से जुड़ी गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। महाप्रबंधक पूर्व रेलवे गीतिका पांडेय के नेतृत्व में चल रहे अभियान की थीम “स्वच्छता में सहभाग: स्वच्छ भारत, विकसित भारत” रखी गई है। इसमें स्रोत पर कचरे का पृथक्करण, कम्पोस्टिंग, प्लास्टिक का कम इस्तेमाल और उपयोगी वस्तुओं के पुनः उपयोग पर विशेष जोर है।
अब ‘दो नहीं, चार’ तरह से होगा कचरा अलग
मालदा मंडल के मालदा टाउन, भागलपुर और जमालपुर स्टेशनों के साथ ट्रेनों में भी यात्रियों को कचरा अलग-अलग रखने के लिए जागरूक किया गया। हरा डिब्बा गीले कचरे, नीला सूखे एवं पुनर्चक्रण योग्य कचरे, पीला सैनिटरी कचरे और काला अवशिष्ट कचरे के लिए निर्धारित किया गया है। इस व्यवस्था का उद्देश्य कचरे को शुरुआत में ही अलग कर उसके उचित निस्तारण और पुनर्चक्रण की प्रक्रिया को आसान बनाना है।
‘नेकी की दीवार’ से जरूरतमंदों तक पहुंचेगी उपयोगी सामग्री
मालदा मंडल में ‘नेकी की दीवार’ को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके माध्यम से उपयोगी वस्तुओं को फेंकने के बजाय जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाने की पहल की जा रही है। जंगीपुर रोड सेक्शन में स्वच्छ पेयजल सुनिश्चित करने के लिए जल स्रोतों की सफाई और शुद्धीकरण अभियान भी चलाया गया।
हावड़ा में कम्पोस्टिंग और बोतल क्रशिंग पर जोर
हावड़ा मंडल के स्टेशनों, रेलवे कॉलोनियों और कार्यशालाओं में जनभागीदारी के साथ अभियान चलाया गया। “अब दो नहीं, चार” पहल के तहत स्रोत पर चार प्रकार के कचरे के पृथक्करण के साथ विकेंद्रीकृत जैव-कम्पोस्टिंग इकाइयों और प्लास्टिक बोतल क्रशिंग मशीनों का उपयोग बढ़ाया जा रहा है। वेंडरों को कपड़े के थैले वितरित करने तथा स्वयंसेवी संगठनों और स्वयं सहायता समूहों के जरिए घर-घर जागरूकता अभियान चलाने की पहल भी की गई है। RRR हब और ‘नेकी की दीवार’ को मजबूत करने में सामुदायिक भागीदारी पर जोर दिया जा रहा है।
सियालदह और आसनसोल में घर-घर पहुंचा अभियान
सियालदह मंडल में स्टेशनों, रेलवे कॉलोनियों, अस्पतालों सहित विभिन्न परिसरों में समुदाय की भागीदारी से स्वच्छता कार्यक्रम चलाए गए। कपड़े के थैलों और बोतल क्रशिंग मशीनों के इस्तेमाल के साथ घर-घर कचरा पृथक्करण की जानकारी दी गई। CSR सहयोग से कम्पोस्टिंग तथा शून्य-कचरा गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया गया। वहीं आसनसोल मंडल ने मधुपुर, जसीडीह, आसनसोल, सीतारामपुर और अंडाल की रेलवे कॉलोनियों में प्लास्टिक बोतल क्रशिंग मशीनों के संचालन और स्रोत पर कचरा पृथक्करण को लेकर जागरूकता अभियान चलाया। स्थानीय लोगों के बीच पर्यावरण-अनुकूल जूट के थैले भी वितरित किए गए। पूर्व रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शिबराम माझी ने कहा कि स्वच्छता को एक बार की गतिविधि के बजाय निरंतर जनभागीदारी का अभियान बनाने पर जोर है। कचरा पृथक्करण, कम्पोस्टिंग, ‘नेकी की दीवार’ और सिंगल-यूज प्लास्टिक में कमी जैसी पहलों के जरिए रेलवे कर्मचारी, यात्री और स्थानीय समुदाय मिलकर अधिक स्वच्छ एवं टिकाऊ रेलवे परिसर तैयार करने में भागीदारी कर रहे हैं।










