
कलश स्थापना के लिए तीन शुभ समय, मां दुर्गा का आगमन और प्रस्थान दोनों गज पर; 16 से 21 अक्टूबर तक होंगे विशेष अनुष्ठान
दैनिक बिहार पत्रिका। शारदीय नवरात्र इस वर्ष 11 अक्टूबर 2026, रविवार से प्रारंभ होगी। आचार्य शुभम सावर्ण के अनुसार इस वर्ष नवरात्रि 10 दिनों की होगी और 21 अक्टूबर, बुधवार को उदयकालीन विजयादशमी के साथ नवरात्र व्रत का पारण होगा। दशमी तिथि 21 अक्टूबर को दिन के 11:01 बजे तक रहेगी।
आचार्य के अनुसार इस वर्ष मां दुर्गा का आगमन हाथी अर्थात गज पर हो रहा है, जिसे शुभप्रद माना गया है। रविवार को नवरात्रि शुरू होने के कारण मां का आगमन गज पर बताया गया है। वहीं बुधवार, 21 अक्टूबर को मां का प्रस्थान भी हाथी पर होगा। शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार गज पर आगमन एवं प्रस्थान को शुभ माना गया है और इससे अच्छी वर्षा तथा जनमानस में धन-धान्य की वृद्धि की मान्यता बताई गई है।
इस वर्ष कलश स्थापना को लेकर विशेष स्थिति है। चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग के कारण शुभ मुहूर्त सीमित हैं। आचार्य के अनुसार निर्णय सिंधु में तिथि के शुरुआती त्रिभाग, अभिजीत मुहूर्त अथवा मीन लग्न में कलश स्थापना का विशेष उल्लेख मिलता है। कलश स्थापना के लिए प्रातः 6:15 बजे से 10:12 बजे तक का समय बताया गया है। इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:07 बजे से 11:54 बजे तक तथा मीन लग्न का समय शाम 4:40 बजे से 6:09 बजे तक रहेगा।
16 अक्टूबर, शुक्रवार को कात्यायनी देवी के दर्शन-पूजन के साथ गज पूजा होगी। इसी दिन संध्या बेला में बिल्वाभिमंत्रण की परंपरा होगी। षष्ठी तिथि में बेल वृक्ष को साक्षात मां दुर्गा का स्वरूप मानकर देवी को जगाने के लिए बोधन, पूजन एवं अधिवास किया जाएगा।
17 अक्टूबर, शनिवार को महा सप्तमी के अवसर पर नवपत्रिका प्रवेश, दुर्गा प्रतिमा में नयनदान एवं प्राण-प्रतिष्ठा के अनुष्ठान होंगे।
18 अक्टूबर, रविवार को प्रातः 6:05 बजे से अष्टमी तिथि प्रारंभ होगी, जिसकी मान्यता पूरे दिन और रात्रि तक रहेगी। इस दिन महाअष्टमी व्रत एवं दुर्गा अष्टमी का पूजन होगा। रात्रि में निशा पूजा, देवी जागरण तथा विभिन्न परंपरागत अनुष्ठान किए जाएंगे। मंदिरों में कुलाचार के अनुसार बलि की परंपरा का भी उल्लेख किया गया है।
19 अक्टूबर, सोमवार को अष्टमी तिथि दिन के 8:04 बजे समाप्त होगी और इसके बाद नवमी तिथि प्रारंभ होगी। तिथि वृद्धि के कारण इस वर्ष अष्टमी दो दिनों तक मानी जा रही है। आचार्य के अनुसार प्रथम अष्टमी व्रत के लिए द्वितीय दिवस की अष्टमी को शून्य अष्टमी माना जाएगा। इसी दिन संधि पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 7:40 बजे से 8:28 बजे तक बताया गया है। इस अवधि में भगवती की तंत्रोक्त पूजा एवं विशेष आराधना की जाएगी।
20 अक्टूबर, मंगलवार को शुद्ध नवमी तिथि रहेगी। नवमी तिथि दिन के 9:44 बजे तक रहेगी, हालांकि इसकी धार्मिक मान्यता पूरे दिन रहेगी। इस दिन सिद्धिदात्री एवं त्रिशूलनी पूजा, कुमारी पूजन, विप्र पूजन, हवन एवं बलिप्रदान के साथ महानवमी के अनुष्ठान संपन्न होंगे। कुलाचार के अनुसार कुष्मांड, नारियल एवं छाग बलि की परंपरा का भी उल्लेख किया गया है।
21 अक्टूबर, बुधवार को उदयव्यापिनी विजयादशमी तिथि रहेगी, जो दिन के 11:01 बजे तक रहेगी। इस दिन अपराजिता पूजन, शमी पूजन एवं आयुध पूजन के साथ जयंती धारण की परंपरा होगी। इसी दिन नवरात्र व्रत का पारण किया जाएगा। प्रातः कलश विसर्जन तथा संध्या 6:30 बजे से दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन किए जाने की बात कही गई है। इसके साथ ही शारदीय नवरात्र का समापन होगा।
आचार्य शुभम सावर्ण ने बताया कि उक्त तिथियां और मुहूर्त निर्णय सिंधु, धर्मसिंधु एवं देवी पुराण में वर्णित परंपराओं के आधार पर बताए गए हैं।








