
कचहरी रोड एवं सोनमंखी-गौशाला रोड पर BUIDCO से बन रहे नाले के लेवल, एलाइनमेंट, क्यूरिंग और कंक्रीट गुणवत्ता की जांच की मांग
दैनिक बिहार पत्रिका। खगड़िया। नगर परिषद खगड़िया क्षेत्र अंतर्गत कचहरी रोड एवं सोनमंखी-गौशाला रोड में BUIDCO द्वारा कराए जा रहे निर्माणाधीन नाले की गुणवत्ता एवं निर्माण प्रक्रिया को लेकर नगर सभापति अर्चना कुमारी ने चिंता जताई है। उन्होंने इस संबंध में खगड़िया लोकसभा के सांसद को पत्र भेजकर मामले में हस्तक्षेप करते हुए नाला निर्माण की उच्चस्तरीय एवं स्वतंत्र तकनीकी जांच कराने की मांग की है।
नगर सभापति ने कहा कि नाला निर्माण का उद्देश्य शहर की जलनिकासी व्यवस्था को बेहतर करना और लोगों को जलजमाव की समस्या से राहत दिलाना है। ऐसे में सरकारी राशि से बनने वाली इस महत्वपूर्ण परियोजना में यदि निर्माण के स्तर पर तकनीकी कमी रह जाती है तो आने वाले वर्षों में इसका असर शहर की जलनिकासी व्यवस्था पर पड़ सकता है।
नगर सभापति प्रतिनिधि ज्योतिष मिश्रा द्वारा निर्माण कार्य को लेकर लगातार सवाल उठाए जाने और जिलाधिकारी के समक्ष शिकायत किए जाने के बाद प्रशासन की ओर से भी मामले को गंभीरता से लिया गया। इसके बाद SDM धनंजय कुमार की अध्यक्षता में पुल निगम के कार्यपालक अभियंता, RCD के कार्यपालक अभियंता तथा नगर परिषद खगड़िया की कार्यपालक पदाधिकारी सिन्धु कमल की मौजूदगी में निर्माणाधीन नाले का स्थल निरीक्षण किया गया।
निरीक्षण के दौरान नाले के लेवल, एलाइनमेंट, कंक्रीट की स्थिति, निर्माण प्रक्रिया और क्यूरिंग समेत विभिन्न तकनीकी पहलुओं को देखा गया। नगर सभापति की ओर से सांसद को दिए गए आवेदन में कहा गया है कि निर्माण की गुणवत्ता से जुड़े कुछ बिंदुओं पर विस्तृत तकनीकी जांच की आवश्यकता है।
नगर सभापति ने विशेष रूप से क्यूरिंग की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाया है। शिकायत के अनुसार, निर्धारित तकनीकी प्रक्रिया के तहत पर्याप्त अवधि तक क्यूरिंग किया जाना जरूरी है, जबकि कुछ स्थानों पर मात्र एक से दो दिन क्यूरिंग किए जाने की बात सामने आई है। नगर सभापति ने मांग की है कि इस बिंदु की विशेषज्ञ अभियंताओं से विधिवत जांच कराई जाए, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
कंक्रीट कार्य में वाइब्रेटर के समुचित उपयोग को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायत के अनुसार कुछ स्थानों पर कंक्रीट में हनीकॉम्बिंग और छेद जैसी स्थिति दिखाई दे रही है। नगर सभापति का कहना है कि यदि कंक्रीट डालने के दौरान निर्धारित तकनीकी प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ है तो इससे संरचना की मजबूती प्रभावित हो सकती है। ऐसे में केवल सतही मरम्मत के बजाय पूरे निर्माण की तकनीकी गुणवत्ता की जांच आवश्यक है।
नाले के कुछ हिस्सों के लेवल और एलाइनमेंट को लेकर भी शिकायत सामने आई है। नगर सभापति के अनुसार कहीं नाला सड़क के स्तर से नीचे तो कहीं अपेक्षाकृत अधिक ऊंचाई पर दिखाई देने की बात कही गई है। उन्होंने कहा कि प्रभावी जलनिकासी के लिए नाले का सही लेवल और पर्याप्त ढलान महत्वपूर्ण है। इसलिए दोनों नालों की लेवल, ढलान, गहराई, चौड़ाई और एलाइनमेंट की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जानी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि नाला निर्माण को शहर के भविष्य के विकास को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। यदि भविष्य में सड़क चौड़ीकरण प्रस्तावित है तो नाले का वर्तमान एलाइनमेंट बाद के विकास कार्यों में बाधा न बने, इसकी भी तकनीकी समीक्षा जरूरी है। साथ ही DPR, स्वीकृत प्राक्कलन और तकनीकी डिजाइन के अनुरूप निर्माण सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
नगर सभापति अर्चना कुमारी ने कहा कि यदि उच्चस्तरीय तकनीकी जांच में निर्माण कार्य में अनियमितता, गुणवत्ता में कमी या निर्धारित मानकों की अनदेखी प्रमाणित होती है तो संबंधित अभियंता, संवेदक अथवा अन्य जिम्मेदार व्यक्ति की भूमिका की जांच कर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि विकास कार्य जनता के हित के लिए होते हैं और किसी भी परियोजना में गुणवत्ता से समझौता नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी विकास कार्य को रोकना नहीं है। शहर में बेहतर जलनिकासी के लिए नाला निर्माण जरूरी है और वह चाहती हैं कि परियोजना जल्द पूरी हो। लेकिन निर्माण मजबूत, गुणवत्तापूर्ण और तकनीकी मानकों के अनुरूप हो, यह भी उतना ही आवश्यक है। निर्माण के दौरान ही किसी तकनीकी कमी की पहचान होने पर उसे समय रहते दूर किया जा सकता है, जबकि निर्माण पूरा होने के बाद कमी सामने आने पर सुधार के लिए दोबारा सरकारी राशि खर्च होने की आशंका रहती है।
नगर सभापति ने सांसद से आग्रह किया है कि वे संबंधित विभाग और जिला प्रशासन के स्तर पर आवश्यक पहल करते हुए उच्चस्तरीय एवं स्वतंत्र तकनीकी जांच सुनिश्चित कराने में सहयोग करें, ताकि निर्माण की गुणवत्ता को लेकर उठ रहे सवालों का निष्पक्ष समाधान हो सके। उन्होंने कहा कि खगड़िया की जनता के हित में बनने वाली इस महत्वपूर्ण जलनिकासी परियोजना को गुणवत्ता और पारदर्शिता के साथ पूरा कराया जाना चाहिए।








