
बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य डॉ. सुग्रीव दास ने किया निरीक्षण; शिक्षा, पुस्तकालय, योग और संगीत की सुविधाओं का लाभ उठाने पर जोर
बांका:- परिस्थितियां भले ही कठिन रही हों, लेकिन शिक्षा, अनुशासन और सकारात्मक सोच के सहारे भविष्य को बेहतर बनाया जा सकता है। इसी संदेश के साथ बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य डॉ. सुग्रीव दास ने बांका के पर्यवेक्षण गृह में आवासित किशोरों से संवाद किया और उन्हें यहां उपलब्ध सुविधाओं का बेहतर उपयोग कर जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
9 सितंबर 2026 को पर्यवेक्षण गृह, बांका के निरीक्षण के दौरान आयोग के सदस्य ने वहां रह रहे किशोरों से बातचीत कर उनकी दिनचर्या और उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी ली। उन्होंने किशोरों को संयमित रहने तथा पढ़ाई और रचनात्मक गतिविधियों से जुड़ने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि विषम परिस्थितियों के कारण पर्यवेक्षण गृह में आने के बावजूद किशोरों के सामने आगे बढ़ने के अवसर मौजूद हैं। यहां रहने की अवधि को सकारात्मक रूप से लेते हुए शिक्षा, पुस्तकालय, योग और संगीत जैसी सुविधाओं का समुचित उपयोग किया जाए। पढ़ाई के साथ कुछ नया सीखने का प्रयास उन्हें भविष्य में आगे बढ़ने में मदद कर सकता है।
रखरखाव मिला संतोषप्रद
निरीक्षण के दौरान पर्यवेक्षण गृह के रखरखाव की भी समीक्षा की गई, जिसे संतोषप्रद पाया गया। इसके साथ ही व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए कई सुझाव दिए गए। आयोग के सदस्य ने प्रभारी अधीक्षक सह बाल संरक्षण पदाधिकारी सुधीर कुमार को भोजन की गुणवत्ता बनाए रखने तथा भोजनालय की नियमित साफ-सफाई सुनिश्चित करने को कहा। इसके अलावा आवासित किशोरों की नियमित जांच कराने और उनके स्वास्थ्य एवं दिनचर्या पर ध्यान देने का सुझाव दिया गया।
रचनात्मक गतिविधियों और शारीरिक शिक्षा पर जोर
किशोरों के मानसिक एवं शारीरिक विकास को ध्यान में रखते हुए उन्हें अधिक से अधिक रचनात्मक गतिविधियों, व्यायाम और शारीरिक शिक्षा से जोड़ने पर भी जोर दिया गया। उद्देश्य यह है कि पर्यवेक्षण गृह में रहने के दौरान किशोर शिक्षा के साथ अपनी प्रतिभा और कौशल को विकसित कर सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ सकें। निरीक्षण के दौरान गृहपति अजय कुमार, पीओ कल्याणी गुप्ता, गृहपिता मुकेश कुमार एवं शारीरिक शिक्षक आनंद परमार उपस्थित रहे। वहीं आयोग के सदस्य के सहयोगी के रूप में मिथुन कुमार भी मौजूद रहे।









