
खगड़िया, 14 सितंबर। समाहरणालय स्थित सभाकक्ष में सोमवार को जिलाधिकारी विक्रम विरकर की अध्यक्षता में राष्ट्रीय हिंदी दिवस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन सामान्य शाखा की ओर से किया गया। इसमें उप विकास आयुक्त श्रेया श्री, विशेष कार्य पदाधिकारी, वरीय उप समाहर्ता, जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी समेत जिले के अन्य पदाधिकारी एवं कर्मी शामिल हुए। कार्यक्रम में विद्यालय एवं महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने भी भाग लिया।

इस अवसर पर जिलाधिकारी विक्रम विरकर ने कहा कि हिंदी का विकास केवल हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके लिए अपनी स्थानीय बोली और भाषाई जड़ों से जुड़ाव भी जरूरी है। उन्होंने कहा, “अपनी बोली से जुड़ाव और उसके प्रति सम्मान के बिना हिंदी का विकास संभव नहीं है।”
जिलाधिकारी ने कहा कि कई बार लोग स्वयं को अधिक आधुनिक दिखाने के प्रयास में अपनी स्थानीय बोली से दूरी बनाने लगते हैं। इस सोच को बदलने की आवश्यकता है। अपनी बोली बोलना कमजोरी नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पहचान और अपनी जड़ों से जुड़ाव का प्रतीक है। स्थानीय बोलियों की समृद्धि हिंदी को और अधिक व्यापक एवं जीवंत बनाती है।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने हिंदी भाषा की विशेषताओं, उसके महत्व तथा दैनिक जीवन और समाज में हिंदी की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि हिंदी केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कृति, परंपरा, साहित्य और सामाजिक भावनाओं की सशक्त अभिव्यक्ति भी है। इस दौरान हिंदी के कवियों एवं साहित्यकारों ने हिंदी की समृद्ध साहित्यिक परंपरा, वर्तमान समय में इसकी उपयोगिता तथा इसके प्रचार-प्रसार की आवश्यकता पर अपने विचार रखे।
कार्यक्रम में स्थानीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं और बोलियों के संरक्षण एवं संवर्धन पर भी विशेष जोर दिया गया। छात्र-छात्राओं को अपनी भाषा, बोली और सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान बनाए रखने तथा दैनिक जीवन में हिंदी एवं स्थानीय बोली के अधिकाधिक प्रयोग के लिए प्रेरित किया गया।











