कानूनी प्रक्रिया की अनदेखी का आरोप, पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवाल
सुपौल। जिले की जदिया थाना पुलिस इन दिनों अपनी कार्यशैली को लेकर विवादों के केंद्र में आ गई है। आरोप है कि पुलिस ने एक युवक को 24 घंटे तक हाजत में रखने के बाद बिना मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किए छोड़ दिया, जो कानूनन गंभीर सवाल खड़े करता है।
मामला जदिया थाना क्षेत्र के कोरियापट्टी पश्चिम से जुड़ा है। वर्तमान पैक्स अध्यक्ष ने मानगंज पश्चिम पंचायत वार्ड संख्या–8 निवासी नसीर खां के दामाद समेत अन्य लोगों पर पैसा और मोबाइल लूट सहित संगीन आरोप लगाते हुए जदिया पुलिस को सूचना दी थी। बताया गया कि किसी कारणवश पुलिस मौके पर देर से पहुंची। इसके बाद पैक्स अध्यक्ष ने सीधे (पुलिस अधीक्षक, सुपौल) को फोन कर सूचना दी।
एसपी के संज्ञान के बाद 112 पुलिस, यातायात पुलिस और जदिया थाना पुलिस को घटनास्थल पर पहुंचने का निर्देश दिया गया। मौके पर पहुंची पुलिस ने पैक्स अध्यक्ष से बातचीत की और नसीर खां के घर की तलाशी ली। इसी दौरान नसीर खां के दामाद को जदिया थानाध्यक्ष नंदकिशोर नंदन द्वारा हिरासत में लेकर थाने ले जाया गया। यह घटना मंगलवार दिन के करीब 10:00 बजे की बताई जा रही है।
इसके बाद मामला और उलझता नजर आया। पैक्स अध्यक्ष द्वारा लिखित आवेदन में गंभीर आरोप लगाए जाने के बावजूद प्राथमिकी दर्ज नहीं होने का सवाल खड़ा हुआ। जब मंगलवार देर शाम थानाध्यक्ष से इस संबंध में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि आवेदन नहीं दिया गया है। वहीं, थाना कर्मियों से पूछताछ में बताया गया कि युवक अभी हाजत में ही है।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, बुधवार दोपहर करीब 3 बजे मामले को कथित तौर पर रफा-दफा कर युवक को छोड़ दिया गया, जबकि उस पर गंभीर आरोप लगाए गए थे। इससे कई सवाल उठ रहे हैं—
- क्या पैक्स अध्यक्ष ने अपना दावा वापस ले लिया?
- अगर दावा वापस लेना था, तो मामला एसपी तक क्यों पहुंचाया गया?
- बिना प्राथमिकी और मजिस्ट्रेट पेशी के युवक को 24 घंटे हाजत में रखने की जरूरत क्यों पड़ी?
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 22(2) और दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 57 (अब बीएनएसएस) के तहत किसी भी गिरफ्तार व्यक्ति को 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना अनिवार्य है। ऐसा न होने पर गिरफ्तारी गैरकानूनी मानी जा सकती है।
इस पूरे घटनाक्रम ने जदिया पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। अब यह मामला जिले में चर्चा का विषय बन गया है और लोग निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं, ताकि स्पष्ट हो सके कि पुलिस ने कानून के तहत कार्रवाई की या फिर प्रक्रिया की अनदेखी हुई।
रिपोर्ट: पप्पू आलम, दैनिक बिहार पत्रिका
Author: दैनिक बिहार पत्रिका
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